बेंगलुरु: कर्नाटक के चीनी मंत्री शिवानंद पाटिल ने आगामी गन्ना पेराई सत्र से पहले चीनी मिलों से बिजली खरीद के लिए समझौते करने की योजना की घोषणा की है। विधान परिषद में एक सत्र के दौरान उन्होंने सदस्य रवि कुमार और अन्य द्वारा नियम 330 के तहत दिए गए नोटिस का जवाब देते हुए कहा कि, यदि केंद्र सरकार चीनी का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) बढ़ाती है, तो इससे चीनी मिलों और गन्ना किसानों की कई समस्याएं दूर हो सकती हैं।
गन्ना किसानों और मिलों के सामने आने वाली चुनौतियों के समाधान के लिए मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में पहले ही एक बैठक आयोजित की जा चुकी है। पाटिल ने बताया कि, चीनी मिल मालिकों की मांगों में से केवल दो ही राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में आती हैं—बिजली खरीद समझौता और जल कर से संबंधित मांग—जिन पर मुख्यमंत्री ने विचार करने का आश्वासन दिया है।
मंत्री पाटिल ने केंद्र सरकार से चीनी निर्यात की अनुमति देने और उत्पादन के आधार पर एथेनॉल की कीमतों में संशोधन करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने विश्वास जताया कि, इन मांगों के पूरा होने से गन्ना किसानों की समस्याएं भी हल हो जाएंगी। इसके अलावा, उन्होंने केंद्र सरकार से घरेलू और व्यावसायिक उपयोग के लिए एलपीजी की अलग-अलग कीमतें निर्धारित करने का आग्रह किया, जिससे उपभोक्ताओं को लाभ मिलेगा और किसानों की चिंताओं का समाधान होगा।
मंत्री ने बताया कि, राज्य ने पिछले दो वर्षों से गन्ना किसानों को पूरा भुगतान किया है। इस वर्ष की पेराई अभी जारी है और उन्होंने भरोसा दिलाया कि किसानों को पूरा भुगतान जारी रहेगा। उन्होंने विधान परिषद को जानकारी दी कि देश के शीर्ष तीन चीनी उत्पादक राज्यों में कर्नाटक ही ऐसा राज्य है, जिसने किसानों को पूर्ण भुगतान किया है, जबकि महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश में अभी भी बकाया राशि लंबित है।


















