मुंबई : राज्य के चीनी उद्योग की समस्याओं को लेकर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मंगलवार (24 मार्च ) को विधानभवन में दोपहर 1 बजे सभी संबंधित पक्षों की एक अहम बैठक बुलाई है। इस बैठक में उद्योग से जुड़े मुद्दों पर विस्तृत चर्चा होगी।इसमें मिलों के कर्ज के पुनर्गठन, केंद्र सरकार के सामने रखी जाने वाली मांगें, राज्य सरकार के नीतिगत निर्णय और अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर प्राथमिकता से विचार-विमर्श होने की संभावना है।
बैठक में उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार, जल संसाधन मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटील, सार्वजनिक निर्माण मंत्री शिवेंद्रसिंहराजे भोसले, सहकार मंत्री बाबासाहेब पाटील, विधायक दिलीप वळसे पाटील, जयंत पाटील, विनय कोरे, अभिमन्यू पवार, राज्य सहकारी बैंक के प्रशासक विद्याधर अनास्कर, चीनी आयुक्त डॉ. संजय कोलते, सहकार आयुक्त दीपक तावरे सहित अन्य अधिकारी और चीनी उद्योग संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित रहेंगे।
राज्य के चीनी मिलों पर लगभग 13 हजार करोड़ रुपये का बैंक कर्ज है। लेकिन उनके पास कर्ज चुकाने के लिए पर्याप्त नकदी उपलब्ध नहीं होने से गंभीर स्थिति बनी हुई है।केंद्र सरकार ने गन्ना पेराई सत्र 2025-26 के लिए 10.25 प्रतिशत रिकवरी पर प्रति टन 3550 रुपये का दर तय किया है। हालांकि, वास्तविकता में बैंकों द्वारा चीनी के बदले गिरवी पर केवल 2390 रुपये प्रति क्विंटल की एफआरपी राशि दी जा रही है। इससे शेष भुगतान के लिए प्रति क्विंटल 1160 रुपये की कमी पड़ रही है। इस मुद्दे पर बैठक में चर्चा कर आर्थिक सहायता को लेकर निर्णय लिए जाने की उम्मीद है।
चीनी मिलों पर 3968 करोड़ रुपये एफआरपी बकाया…
महाराष्ट्र में 15 मार्च तक राज्य के 159 चीनी मिलों पर गन्ना किसानों का करीब 3968 करोड़ रुपये का एफआरपी बकाया है।यह जानकारी चीनी आयुक्तालय की रिपोर्ट में सामने आई है। आंकड़ों के अनुसार, राज्य में कुल 208 मिलों में से 159 मिलों ने अभी तक किसानों को पूरा एफआरपी भुगतान नहीं किया है, जबकि केवल 49 मिलों ने 100 प्रतिशत भुगतान किया है। 15 मार्च तक राज्य में 1015.87 लाख मीट्रिक टन गन्ने की पेराई की जा चुकी है। बकाया गन्ना भुगतान को लेकर राज्य की किसान संगठनों ने आक्रामक रुख अपना लिया है और जल्द भुगतान की मांग कर रहे हैं। वहीं, चीनी आयुक्त कार्यालय ने भी इस मुद्दे पर मिलों की सुनवाई शुरू कर दी है।


















