महाराष्ट्र : एथेनॉल स्टोव का अनुसंधान; कोल्हे चीनी मिल की स्वदेशी तकनीक की उपलब्धि

अहिल्यानगर: युद्ध जैसी परिस्थितियों के कारण एलपीजी गैस की कमी महसूस की जा रही है।इस कमी का असर व्यवसायियों के साथ-साथ आम लोगों पर भी पड़ रहा है। संजीवनी उद्योग समूह, सहकार महर्षि शंकरराव कोल्हे चीनी मिल और पुणे स्थित एक कंपनी द्वारा ‘आत्मनिर्भर भारत’ के तहत विकसित किया गया एथेनॉल से चलने वाला स्टोव व्यावसायिक ग्राहकों के लिए वरदान साबित हो सकता है। ईंधन की कमी से निपटने के लिए यह एक लाभदायक विकल्प माना जा रहा है।

सहकारी चीनी उद्योग में सहकार महर्षि शंकरराव कोल्हे चीनी मिल ने कई पायलट प्रोजेक्ट लागू कर सहकार क्षेत्र को नई दिशा दी है। इसकी सराहना केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान को यह कारखाना हमेशा समर्थन देता रहा है। इसी दिशा में एलपीजी गैस के विकल्प के रूप में एथेनॉल का उपयोग किया जा सकता है।

दैनिक ‘सकाळ’ से बात करते हुए सहकार महर्षि शंकरराव कोल्हे मिल के अध्यक्ष विवेक कोल्हे ने कहा कि, देश में लगभग 60 प्रतिशत एलपीजी गैस आयात की जाती है, जिसमें से 90 प्रतिशत गैस खाड़ी देशों से आती है। व्यावसायिक गैस उपभोक्ताओं को जितनी सब्सिडी मिलती है, लगभग उसी कीमत में यह स्टोव उपलब्ध हो सकता है, जिससे यह किफायती बनता है। देश में एथेनॉल उत्पादन के लिए 40,000 करोड़ रुपये का निवेश किया गया है। पेट्रोल में 20 प्रतिशत तक एथेनॉल मिलाने की अनुमति है, जिससे लगभग 1000 करोड़ लीटर एथेनॉल उपयोग होता है, लेकिन इसके बावजूद इतनी ही मात्रा में एथेनॉल अतिरिक्त बच जाता है। इस अतिरिक्त एथेनॉल के उपयोग का सवाल बना हुआ है।

विवेक कोल्हे ने कहा कि, केन्या जैसे देशों में 15 लाख घरों में यह एथेनॉल स्टोव उपयोग किया जा रहा है।यदि सरकार अनुमति देती है, तो वे प्रायोगिक आधार पर तुरंत यह स्टोव उपलब्ध करा सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि, यदि सरकार व्यावसायिक सिलेंडर के लिए नीतिगत निर्णय लेती है, तो 500 से 600 करोड़ लीटर एथेनॉल का उपयोग कमर्शियल फ्यूल के रूप में किया जा सकता है। सरकार को एथेनॉल स्टोव को अनुमति देनी चाहिए, क्योंकि यह सुरक्षित और लाभदायक है। इससे किसानों को ‘अन्नदाता’ से ‘ऊर्जादाता’ बनने में मदद मिलेगी और सहकारी चीनी मिलों को नई ऊर्जा (नवसंजीवनी) मिल सकती है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here