नई दिल्ली: राष्ट्रीय सहकारी चीनी मिल महासंघ (NFCSF) ने सरकार के उस फैसले का स्वागत किया है, जिसमें 1 अप्रैल से 20 प्रतिशत तक एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (E20) की बिक्री अनिवार्य करने का प्रावधान किया गया है।महासंघ ने इसे भारत की ऊर्जा सुरक्षा और कृषि अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक साहसिक कदम बताया है।इस ईंधन के लिए न्यूनतम रिसर्च ऑक्टेन नंबर (RON) 95 निर्धारित किया गया है। दिल्ली स्थित NFCSF संगठन देशभर की सहकारी चीनी मिलों का प्रतिनिधित्व करता है। NFCSF ने नीति की सराहना करते हुए उन प्रयासों की आलोचना की, जिन्हें उसने भ्रामक अभियान बताया। संगठन एथेनॉल उत्पादन से जुड़े कई लंबित मुद्दों के समाधान के लिए केंद्र सरकार के साथ काम कर रहा है। इनमें एथेनॉल की खरीद कीमत बढ़ाने, आपूर्ति आवंटन बढ़ाने और एथेनॉल खरीद कार्यक्रम के साइकिल-2 के तहत नया टेंडर जारी करने जैसी मांगें शामिल हैं।
NFCSF ने कहा कि, सरकार को इस विषय में आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी करना चाहिए, ताकि जनता भ्रमित न हो। संगठन ने यह भी जोर दिया कि एथेनॉल मिश्रण नीति विस्तृत तकनीकी और वैज्ञानिक अध्ययन के बाद तैयार की गई है।एनएफसीएसएफ के अध्यक्ष हर्षवर्धन पाटिल ने इस फैसले के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी का आभार व्यक्त किया और इसे दूरदर्शी निर्णय बताया।सरकारी अधिसूचना के अनुसार, तेल विपणन कंपनियों को भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के मानकों के अनुसार 20% तक एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल बेचने का निर्देश दिया गया है। इस ईंधन का रिसर्च ऑक्टेन नंबर (RON) कम से कम 95 होना अनिवार्य है और यह नियम देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू होगा।
सरकार ने कुछ विशेष परिस्थितियों के लिए लचीलापन भी रखा है।जरूरत पड़ने पर तेल कंपनियों को BIS द्वारा निर्धारित RON मानकों के अनुसार विशिष्ट ग्रेड के पेट्रोल और कुछ क्षेत्रों में एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल बेचने की अनुमति दी जा सकती है।RON किसी ईंधन की इंजन में होने वाली नॉकिंग (असमय दहन) को रोकने की क्षमता को मापने का पैमाना है। नॉकिंग से इंजन की कार्यक्षमता कम हो सकती है और इंजन को नुकसान भी पहुंच सकता है। 95 या उससे अधिक RON वाला ईंधन नॉकिंग को बेहतर तरीके से रोकता है और इंजन को अधिक सुचारु रूप से चलने में मदद करता है।
महासंघ ने कहा कि, इस नीति से एथेनॉल से जुड़े कई क्षेत्रों को लाभ मिलेगा, जिनमें चीनी आधारित डिस्टिलरी, अनाज आधारित डिस्टिलरी और मक्का प्रोसेसिंग उद्योग शामिल हैं। साथ ही, यह कार्यक्रम भारत की आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता कम करने की दिशा में भी अहम कदम है।अनुमानों के अनुसार, एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम के कारण अब तक भारत को कच्चे तेल के आयात पर लगभग 1.4 लाख करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा बचत हुई है। साथ ही, एथेनॉल उत्पादन से जुड़ी फसलों की खेती करने वाले किसानों को हर साल करीब 40,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त लाभ मिल रहा है।
पाटिल ने यह भी कहा कि, खाड़ी क्षेत्र में भू-राजनीतिक तनाव के कारण बढ़ती वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें इस बात को दर्शाती हैं कि देश को घरेलू वैकल्पिक ईंधन स्रोतों को मजबूत करने की जरूरत है। उन्होंने बताया कि दुनिया के सबसे बड़े चीनी उत्पादक देश ब्राजील में भी बढ़ती ऊर्जा कीमतों के कारण आगामी क्रशिंग सीजन में अधिक गन्ना एथेनॉल उत्पादन की ओर मोड़ा जा सकता है।उन्होंने कहा कि, महासंघ एथेनॉल उत्पादन से जुड़े कई लंबित मुद्दों के समाधान के लिए केंद्र सरकार के साथ काम कर रहा है। इनमें एथेनॉल की खरीद कीमत बढ़ाने, आपूर्ति आवंटन बढ़ाने और एथेनॉल खरीद कार्यक्रम के साइकिल-2 के तहत नया टेंडर जारी करने जैसी मांगें शामिल हैं।


















