2012 में रोहित की कंपनी को चीनी इकाई की बिक्री में कोई प्रॉक्सी शामिल नहीं था: अदालत

मुंबई: विशेष अदालत ने कहा है कि, वर्ष 2012 में कन्नड़ सहकारी चीनी मिल की नीलामी के जरिए एनसीपी (एसपी) विधायक रोहित पवार की कंपनी बारामती एग्रो को की गई बिक्री पूरी तरह कानूनी प्रक्रिया के तहत हुई थी। ‘टीओआई’ में प्रकाशित खबर के अनुसार न्यायाधीश ने कहा, नीलामी की पूरी प्रक्रिया 2012 में तब शुरू और पूरी की गई, जब आरबीआई द्वारा नियुक्त प्रशासकों ने बैंक का प्रबंधन संभाल लिया था। अभियोजन की पूरी शिकायत में बैंक के प्रशासकों के खिलाफ किसी भी तरह की साजिश या अवैधता का कोई आरोप नहीं है। इसलिए इस बिक्री की वैधता और कानूनी स्थिति पर कोई सवाल नहीं उठता।

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने आरोप लगाया था कि, बारामती एग्रो ने हाइटेक इंजीनियरिंग कॉरपोरेशन इंडिया को सह-निविदाकर्ता (co-bidder) के रूप में शामिल होने के लिए प्रेरित किया, ताकि प्रतिस्पर्धा का दिखावा किया जा सके।चार्जशीट के अनुसार, नीलामी से ठीक पहले बारामती एग्रो ने हाइटेक इंजीनियरिंग को 5 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए थे, जिसे बाद में उस कंपनी ने अर्नेस्ट मनी डिपॉजिट के रूप में इस्तेमाल किया। इसी आधार पर ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में रोहित पवार को आरोपी बनाया था। हालांकि, आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने ईडी के इन दावों का खंडन किया।

अदालत ने कहा कि, बैंक को नुकसान पहुंचाने के लिए किसी आपराधिक मंशा (mens rea) का कोई सबूत नहीं मिला।न्यायाधीश ने कहा, बारामती एग्रो को सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करने के बाद ही सबसे ऊंची और सफल बोलीदाता घोषित किया गया। इसमें संपत्ति का स्वतंत्र मूल्यांकन, सार्वजनिक विज्ञापन और खुली बोली प्रक्रिया शामिल थी। किसी भी कथित अवैधता के संबंध में कोई विश्वसनीय या ठोस सबूत नहीं है।

अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि, बारामती एग्रो ने 2012 में बैंक ऑफ इंडिया और पंजाब नेशनल बैंक में अपने चालू खातों से विभिन्न किश्तों में 450 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया था।न्यायाधीश ने यह भी कहा कि, बारामती एग्रो की वित्तीय स्थिति मजबूत थी, जिसका प्रमाण 31.9 करोड़ रुपये का लाभ और पर्याप्त भंडार (रिजर्व) है।

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