भाड़ा बढ़ने और बंदरगाहों पर देरी से चावल निर्यात प्रभावित, 4 लाख टन बासमती पर खतरा: एक्सपोर्टर्स फेडरेशन

नई दिल्ली : भारत से चावल निर्यात पर बढ़ते समुद्री ईंधन (मरीन फ्यूल) की कीमतों, अधिक फ्रेट दरों और शिपिंग में देरी का असर पड़ रहा है। सीएनबीसी टीवी18 में प्रकाशित खबर के अनुसार, इंडियन राइस एक्सपोर्टर्स फेडरेशन के देव गर्ग के अनुसार इन कारणों से निर्यात में बड़ी बाधा आ रही है। उन्होंने बताया कि, मूंद्रा और कांडला बंदरगाह जैसे प्रमुख पोर्ट्स पर बासमती चावल के करीब 3,000 कंटेनर फंसे हुए हैं, जबकि बड़ी मात्रा में माल अभी रास्ते में है या गंतव्य बंदरगाहों पर अटका हुआ है। फ्रेट लागत में तेज बढ़ोतरी और बीमा प्रीमियम बढ़ने के कारण निर्यातकों ने चेतावनी दी है कि, लगभग 3.5 से 4 लाख टन बासमती चावल की खेप फिलहाल जोखिम में है।

भारत ने सूखा राहत के लिए मलावी को भेजा 1,000 मीट्रिक टन चावल

इस बीच, भारत ने एल नीनो के कारण पड़े सूखे के बाद खाद्य सुरक्षा प्रयासों में मदद के लिए मलावी को मानवीय सहायता के रूप में 1,000 मीट्रिक टन चावल भेजा है। यह खेप नावा शेवा बंदरगाह से रवाना की गई।विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि, यह सहायता ग्लोबल साउथ के साझेदार देशों के समर्थन और दक्षिण-दक्षिण सहयोग की भावना को आगे बढ़ाने के लिए भारत की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

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