महाराष्ट्र के 6 चीनी मिलों को ‘एनसीडीसी’ से 798 करोड़ रुपये का कर्ज मंजूर

पुणे:केंद्र सरकार के राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी) की ओर से महाराष्ट्र सरकार के माध्यम से कार्यशील पूंजी के लिए मार्जिन मनी के रूप में राज्य की 6 चीनी मिलों को लगभग 798 करोड़ 40 लाख रुपये का कर्ज मंजूर किया गया है। इनमें कोल्हापुर की तीन मिलें तथा सांगली, अहिल्यानगर और बीड की एक-एक मिल शामिल हैं। वहीं, अभी भी राज्य की 8 चीनी मिलें लगभग 1,852 करोड़ रुपये के कर्ज मंजूरी का इंतजार कर रही हैं।एनसीडीसी ने इससे पहले राज्य की 32 चीनी मिलों को लगभग 4,355 करोड़ रुपये का कर्ज दिया था। लेकिन जांच में यह सामने आया कि जिस उद्देश्य के लिए कर्ज दिया गया था, उसी के लिए उसका उपयोग नहीं किया गया। इस पर महाराष्ट्र सरकार से तुरंत रिपोर्ट मांगी गई थी। जब तक यह रिपोर्ट नहीं आती, तब तक बाकी 14 चीनी मिलों के 2,650 करोड़ 54 लाख रुपये के कर्ज प्रस्तावों पर कोई निर्णय नहीं लिया गया था। अब चीनी आयुक्तालय की रिपोर्ट में गंभीर अनियमितता नहीं पाए जाने के बाद, एनसीडीसी ने पूर्ण प्रस्ताव वाली 6 मिलों को कर्ज मंजूरी दे दी है।

कर्ज प्राप्त करने वाली मिलों का विवरण (राशि करोड़ रुपये में):
श्री भोगावती सहकारी चीनी मिल (करवीर-कोल्हापुर) – 114 करोड़
श्री दूधगंगा-वेदगंगा सहकारी चीनी मिल (बिद्री, कोल्हापुर) – 267.80 करोड़
तात्यासाहेब कोरे वारणा सहकारी चीनी मिल (पन्हाला-कोल्हापुर) – 139.63 करोड़
क्रांती कुंडल डॉ. जी. डी. लाड सहकारी चीनी मिल (पलूस-सांगली) – 72.56 करोड़
मुळा सहकारी चीनी मिल (नेवासा-अहिल्यानगर) – 180.20 करोड़
लोकनेते सुंदरराव सोलुंखे सहकारी चीनी मिल (धारुर-बीड) – 30.21 करोड़

प्रस्तावों में खामियों के कारण 8 मिलों की मंजूरी अटकी…

सरकार द्वारा एनसीडीसी को भेजे गए कुछ कर्ज प्रस्ताव अभी भी लंबित हैं। सूत्रों के अनुसार, इनमें विभिन्न खामियां होने के कारण 8 मिलों की मंजूरी अटकी हुई है। इनमें शर्त है कि मिलों ने पिछले 5 में से कम से कम 3 गन्ना पेराई सीजन चलाए हों, लेकिन कई मिलें बंद रही हैं। कुछ पर राज्य सहकारी बैंक का बकाया कर्ज है, जबकि कुछ के पास विस्तार के लिए औद्योगिक उद्यमी मेमोरेंडम (IEM) नहीं है। जिन मिलों की मंजूरी अटकी है, उनमें प्रमुख रूप से श्री रामेश्वर सहकारी साखर कारखाना (भोकरदन), अजिंक्यतारा सहकारी (सातारा), विठ्ठलसाई सहकारी (उमरगा), रावसाहेब पवार घोडगंगा सहकारी (शिरूर-पुणे), सिद्धेश्वर सहकारी (कुमठे-सोलापुर), कर्मयोगी कुंडलिकराव रामराव पाटील कुकडी (पिंपलगांव-अहिल्यानगर), श्री छत्रपती सहकारी (भवानीनगर, इंदापुर-पुणे) और राजगड सहकारी (भोर-पुणे) शामिल हैं।इन 8 मिलों के लगभग 1,852 करोड़ 14 लाख रुपये के कर्ज प्रस्ताव अभी भी एनसीडीसी की मंजूरी के इंतजार में हैं।

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