पुणे (महाराष्ट्र): राज्य में गन्ना किसान ज़्यादातर दो पेड़ी वाली फसल उगाते हैं। लेकिन, पाडेगांव सेंट्रल शुगरकेन रिसर्च सेंटर ने ड्रिप इरिगेशन के तहत तीसरी पेड़ी के लिए टेक्निकल सुझाव दिए हैं। इसलिए, शुगर कमिश्नर डॉ. संजय कोलते ने सभी शुगर फैक्ट्रियों को सर्कुलर जारी कर निर्देश दिए हैं कि, शुगर फैक्ट्रियां किसानों को उनके गन्ने की तीसरी पेड़ी रजिस्टर करने से न रोकें।उन्होंने सर्कुलर में आगे कहा है की, इन निर्देशों को लागू करने के लिए, सभी रीजनल शुगर जॉइंट डायरेक्टर अपने अधिकार क्षेत्र में सभी शुगर फैक्ट्रियों की मीटिंग करें और यह मामला उनके ध्यान में लाएं।शुगर कमिश्नरेट को शिकायतें मिली हैं कि कुछ शुगर फैक्ट्रियां किसानों की गन्ने की तीसरी पेड़ी रजिस्टर करने में आनाकानी कर रही हैं। इसके मद्देनजर, शुगर कमिश्नरेट द्वारा पाडेगांव सेंट्रल शुगरकेन रिसर्च सेंटर से फीडबैक मांगा गया था। इसके मुताबिक शुगर कमिश्नर द्वारा सर्कुलर निर्देश जारी किए गए हैं।
गन्ना एक्सपर्ट्स ने क्या बताया…
पाडेगांव सेंट्रल शुगरकेन रिसर्च सेंटर के गन्ना एक्सपर्ट्स ने बताया है कि, पेड़ी रखते समय कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए, जिसमें, यूनिवर्सिटी द्वारा बताई गई गन्ने की किस्मों की पेड़ी रखनी चाहिए। जैसे, Co. 86032, Phule 0265, Phule 10001, Phule 15012, Phule 13007, Phule 15006।15 फरवरी से पहले काटे गए गन्ने की तीसरी पेड़ी रखनी चाहिए।तीसरी पेड़ी वाली गन्ने की फसल में प्रति एकड़ टहनियों की संख्या लगभग 25 से 30 हजार होनी चाहिए। गन्ने की दूसरी पेड़ी कटने के बाद घास उगने की बीमारी के लक्षण पांच परसेंट से कम होने चाहिए। गन्ने की दूसरी पेड़ी कटने के बाद गन्ने में बीमारी के लक्षण पांच परसेंट से कम होने चाहिए।
इस बात का किसान रखें ध्यान…
यदि गन्ने की तीसरी फसल में जड़ सड़न का प्रकोप अधिक हो तो गन्ने की फसल नहीं काटनी चाहिए। यदि गन्ने की तीसरी फसल में स्केल कीट का प्रकोप अधिक हो तो गन्ने की फसल नहीं काटनी चाहिए। तीसरी फसल तभी रखनी चाहिए जब दूसरी फसल का प्रति एकड़ गन्ना उत्पादन 45 से 50 टन हो। तीसरी फसल के लिए विश्वविद्यालय द्वारा अनुशंसित पोषक तत्वों की संतुलित मात्रा का प्रयोग करना चाहिए। (250 किग्रा नाइट्रोजन, 115 किग्रा फास्फोरस, 115 किग्रा पोटेशियम प्रति हेक्टेयर) यदि मृदा परीक्षण के अनुसार सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी हो तो सूक्ष्म पोषक उर्वरकों के रूप में 10 किग्रा फेरस सल्फेट, 8 किग्रा जिंक सल्फेट, 4 किग्रा मैंगनीज सल्फेट और दो किग्रा बोरेक्स को प्रति एकड़ 1:10 के अनुपात में जैविक खादों के साथ मिलाकर 4 से 5 दिन छाया में सूखने के लिए छोड़ देना चाहिए। पाडेगांव सेंट्रल शुगरकेन रिसर्च सेंटर ने चीनी आयुक्तालय को यह भी सूचित किया है कि यदि गन्ने की पेडी आर्थिक रूप से लाभदायक है तो अगली पेडी रख लेनी चाहिए।


















