सुप्रीम कोर्ट 1 सितंबर, 2025 को E20 ईंधन के खिलाफ जनहित याचिका पर सुनवाई करेगा

नई दिल्ली : सर्वोच्च न्यायालय 1 सितंबर, 2025 को एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करेगा, जिसमे केंद्र सरकार की E20 पेट्रोल नीति को चुनौती दी है। कानूनी समाचार पोर्टल लॉचक्र के अनुसार, इस मामले की सुनवाई भारत के मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई की अध्यक्षता वाली पीठ, न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन और न्यायमूर्ति एन.वी. अंजारिया के साथ करेगी। E20 नीति का उद्देश्य जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करना, कार्बन उत्सर्जन कम करना और स्वच्छ ऊर्जा विकल्पों को बढ़ावा देना है।

याचिकाकर्ता, अधिवक्ता अक्षय मल्होत्रा का तर्क है कि, एथेनॉल-मुक्त विकल्प (E0) प्रदान किए बिना केवल E20 पेट्रोल की पेशकश करना उन लाखों वाहन मालिकों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है जिनके वाहन उच्च एथेनॉल मिश्रण पर चलने के लिए डिजाइन नहीं किए गए हैं। उन्होंने आगे तर्क दिया कि, ईंधन में एथेनॉल की मात्रा के बारे में जन जागरूकता की कमी उपभोक्ताओं को उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत गारंटीकृत, एक सूचित निर्णय लेने के अधिकार से वंचित करती है। याचिका में इस बात पर प्रकाश डाला गया है कि, भारतीय उपभोक्ताओं का एक बड़ा हिस्सा इस बात से अनजान है कि उनके वाहनों में इस्तेमाल होने वाला ईंधन शुद्ध पेट्रोल नहीं, बल्कि पेट्रोल और एथेनॉल का मिश्रण है। इस महत्वपूर्ण तथ्य का खुलासा न करना, सूचित उपभोक्ता विकल्प को कमजोर करता है।

निम्नलिखित राहतें मांगी गई है…

-सुनिश्चित करें कि सभी ईंधन स्टेशनों पर एथेनॉल-मुक्त पेट्रोल (E0) उपलब्ध हो।

-पेट्रोल पंपों और ईंधन डिस्पेंसर पर एथेनॉल की मात्रा का स्पष्ट लेबल लगाएं ताकि उपभोक्ताओं को पता चले कि वे क्या खरीद रहे हैं।

-ईंधन भरवाते समय उपभोक्ताओं को सूचित करें कि, उनके वाहन एथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल के अनुकूल हैं या नहीं।

-सुनिश्चित करें कि उपभोक्ता मामलों का मंत्रालय एथेनॉल-मिश्रित ईंधन के लिए उपभोक्ता संरक्षण नियमों को लागू करे और उचित सलाह जारी करे।

– 20% एथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल (E20) के ईंधन दक्षता और गैर-अनुकूल वाहनों में टूट-फूट पर पड़ने वाले प्रभाव पर एक राष्ट्रव्यापी अध्ययन करें।

पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय (MoPNG) ने इस बात की पुष्टि की है कि, एथेनॉल मिश्रण एक प्रमुख राष्ट्रीय पहल है, और इस कार्यक्रम को गलत सूचनाओं के माध्यम से कमजोर करने के प्रयासों का विरोध किया है। हाल ही में एक बयान में, मंत्रालय ने कार मालिकों के बीच फैलाई जा रही चिंताओं का समाधान किया और उन दावों को खारिज कर दिया कि E20 ईंधन (20% एथेनॉल मिश्रण) का उपयोग करने से वाहन बीमा रद्द हो जाएगा। मंत्रालय ने ज़ोर देकर कहा कि, E20 ईंधन का उपयोग भारत में वाहन बीमा कवरेज को प्रभावित नहीं करता है।

सरकार का एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (EBP) कार्यक्रम कई लक्ष्यों पर केंद्रित है, जिसमें पर्यावरणीय स्थिरता को बढ़ाना, कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करना, विदेशी मुद्रा की बचत करना और घरेलू कृषि अर्थव्यवस्था को समर्थन देना शामिल है। इस पहल के परिणामस्वरूप, एथेनॉल आपूर्ति वर्ष (ईएसवाई) 2014-15 से जुलाई 2025 तक किसानों को ₹1.25 लाख करोड़ से अधिक का भुगतान किया गया है। इसके अतिरिक्त, इस कार्यक्रम ने ₹1.44 लाख करोड़ से अधिक की विदेशी मुद्रा की बचत की है, कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में लगभग 736 लाख मीट्रिक टन की कमी की है और 244 लाख मीट्रिक टन से अधिक कच्चे तेल का प्रतिस्थापन किया है।

ईबीपी कार्यक्रम के तहत प्रगति उल्लेखनीय रही है। सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) ने जून 2022 (ईएसवाई 2021-22 के दौरान) में निर्धारित समय से पहले पेट्रोल में 10% एथेनॉल मिश्रण प्राप्त कर लिया। यह आँकड़ा ईएसवाई 2022-23 में बढ़कर 12.06%, ईएसवाई 2023-24 में 14.60% और वर्तमान ईएसवाई 2024-25 में 31 जुलाई, 2025 तक 19.05% तक पहुँच गया। उल्लेखनीय रूप से, अकेले जुलाई 2025 के दौरान ही मिश्रण 19.93% तक पहुँच गया।

उस महीने, तेल विपणन कंपनियों ने इस कार्यक्रम के तहत 85.3 करोड़ लीटर एथेनॉल की खरीद की, जिससे नवंबर 2024 से जुलाई 2025 तक कुल खरीद 722.7 करोड़ लीटर हो गई। मिश्रण के आंकड़ों से पता चलता है कि जुलाई 2025 में पेट्रोल में 87.9 करोड़ लीटर एथेनॉल मिलाया गया, जिससे इसी अवधि के दौरान कुल एथेनॉल मिश्रण मात्रा 749 करोड़ लीटर हो गई।

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