इरोड: इरोड जिले के ओलापालयम गांव में एक गन्ने के खेत में काम कर रहे मध्य प्रदेश के 24 बंधुआ मजदूरों को छुड़ाया गया है। छुड़ाए गए मजदूरों में पांच लड़के और चार लड़कियां भी शामिल हैं। इस मामले में पुलिस ने रविवार को महाराष्ट्र के एक बिचौलिए को गिरफ्तार किया। पुलिस के अनुसार आरोपी एस. युवराज शिंदे (50) हाल ही में इन मजदूरों को गन्ना कटाई के काम के लिए इरोड लेकर आया था। उसने इनमें से कुछ मजदूरों को पिछले साल नवंबर में ही भर्ती किया था। पुलिस ने बताया कि इससे पहले मजदूरों से लगभग चार महीने तक महाराष्ट्र में काम कराया गया, जहां उन्हें करीब 30,000 रुपये प्रति व्यक्ति भुगतान किया गया था।
22 फरवरी को मजदूरों को इरोड लाने के बाद युवराज ने कथित तौर पर उन्हें ओलापालयम के खेतों में ही रहने के लिए मजबूर किया और बिना मजदूरी दिए गन्ने के खेतों में काम करवाया। अधिकारियों ने बताया कि, मजदूरों को खेत छोड़ने की अनुमति नहीं थी और उनके साथ बंधुआ मजदूरों जैसा व्यवहार किया जा रहा था। यह मामला तब सामने आया जब राष्ट्रीय जनजातीय कल्याण आयोग को मजदूरों की स्थिति के बारे में सूचना मिली और उसने जिला प्रशासन को सतर्क किया। इसके बाद राजस्व अधिकारियों और मोडकुरिची पुलिस की एक टीम ने शनिवार को खेत में जांच की। जांच के बाद मजदूरों को वहां से मुक्त कराकर मोडकुरिची के एक निजी हॉल में ठहराया गया।
राजस्व मंडल अधिकारी (RDO) की शिकायत के आधार पर मोडकुरिची पुलिस ने युवराज को गिरफ्तार कर लिया और उसके खिलाफ बंधुआ मजदूरी अधिनियम की धारा 16, जुवेनाइल जस्टिस एक्ट की धारा 79, बाल श्रम अधिनियम की धारा 14, तथा एससी/एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम की धारा 3(1)(h) के तहत मामला दर्ज किया है। इरोड की पुलिस अधीक्षक ए. सुजाता ने बताया कि आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद बचाए गए मजदूरों को उनके गृह राज्य मध्य प्रदेश वापस भेज दिया जाएगा।

















