ईरान-अमेरिका युद्ध का असर; चीनी की जगह एथेनॉल उत्पादन को तवज्जो मिलने की संभावना बढ़ी, चीनी आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका

नई दिल्ली: ईरान-अमेरिका युद्ध का असर अब साफ दिखाई देने लगा है। तेल और गैस की आपूर्ति में बाधा आने लगी है। भारत के कई स्थानों पर एलपीजी गैस के लिए लंबी कतारें देखी जा रही हैं। लेकिन सिर्फ तेल और गैस ही नहीं, बल्कि चीनी, एल्युमिनियम सहित कई अन्य महत्वपूर्ण उत्पादों की आनेवाले दिनों में कमी महसूस की जा सकती है। अमेरिका-इज़राइल और ईरान के बीच शुरू हुए युद्ध को अब 12 दिन हो चुके हैं, लेकिन इसके रुकने के संकेत नहीं दिख रहे हैं। इस संघर्ष का असर अब वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गंभीर रूप से पड़ने लगा है। तेल और गैस के अलावा इस तनाव का प्रभाव वैश्विक उत्पादन पर भी पड़ रहा है।

हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में तनाव के कारण जहाजों की आवाजाही प्रभावित हो गई है। दुनिया के सबसे ज्यादा तेल, गैस और अन्य उत्पाद इसी मार्ग से होकर गुजरते हैं। इस युद्ध के कारण कई महत्वपूर्ण उत्पादों की आपूर्ति और कीमतों पर असर पड़ा है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता बढ़ गई है। इस तनाव का प्रभाव एथेनॉल और चीनी उद्योग पर भी दिखाई दे रहा है। ब्राज़ील दुनिया के सबसे बड़े चीनी और एथेनॉल उत्पादक देशों में से एक है।तेल की कीमतें बढ़ने के कारण एथेनॉल (वाहनों के ईंधन) की कीमत लगभग 10% बढ़ गई है। इससे संभव है कि, मिलें ज्यादा मुनाफे के लिए चीनी की बजाय एथेनॉल उत्पादन पर अधिक ध्यान दें। इससे भविष्य में चीनी की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।

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