पणजी: राज्य की एकमात्र संजीवनी सहकारी चीनी मिल बंद होने के बाद पिछले पांच वर्षों में गन्ना उत्पादकों की संख्या में 44 प्रतिशत और गन्ने की खेती के क्षेत्र में 46 प्रतिशत की कमी आई है। विधायक वेंजी वीएगस द्वारा विधानसभा में पूछे गए एक लिखित प्रश्न के उत्तर में मुख्यमंत्री डॉ. प्रमोद सावंत ने यह जानकारी दी।
विधायक वीएगस ने पूछा था कि संजीवनी मिल बंद होने के बाद पिछले पांच वर्षों में गन्ना उत्पादक किसानों और गन्ने की खेती के क्षेत्र में कितनी कमी आई है? मिल बंद होने के बाद गन्ना उत्पादक किसानों और मिल से जुड़े मजदूरों को कितनी आर्थिक सहायता दी गई? तथा जिन किसानों ने गन्ने की खेती बंद कर दी, क्या उन्होंने अपनी जमीन पर अन्य फसलें उगाना शुरू किया?
इन प्रश्नों के उत्तर में मुख्यमंत्री डॉ. सावंत द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2020–21 में राज्य के 676 किसान 546 हेक्टेयर क्षेत्र में गन्ने की खेती कर रहे थे। लेकिन 2025–26 तक किसानों की संख्या 44 प्रतिशत घटकर 298 रह गई, जबकि खेती का क्षेत्र घटकर 254.07 हेक्टेयर रह गया। मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि, मिल बंद होने के कारण जिन किसानों ने गन्ने की खेती बंद कर दी, उन्होंने पिछले पांच वर्षों में अपनी जमीन पर नारियल, सुपारी और सब्जियों की खेती शुरू कर दी है।
















