सुप्रीम कोर्ट ने पॉलिटिकल पार्टियों के “फ्रीबीज़” स्कीम को कड़ी फटकार लगाईं, ‘फ़्रीबीज़’ पॉलिटिकल पावर की नई करेंसी

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को सभी राज्यों की पॉलिटिकल पार्टियों द्वारा चलाई जानेवाली “फ्रीबीज़” स्कीमों की कड़ी आलोचना की और पब्लिक फाइनेंस पर इसके असर पर चिंता जताई।कोर्ट ने कहा कि, फ्रीबी स्कीम के ज़रिए रिसोर्स बांटने के बजाय, पॉलिटिकल पार्टियों को ऐसी प्लान की गई पॉलिसी बनानी चाहिए जो लोगों की ज़िंदगी बेहतर बनाने के लिए स्कीम पेश करें, जैसे कि अनएम्प्लॉयमेंट स्कीम।

भारत के चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा, इस तरह के बड़े दान बांटने से देश का इकोनॉमिक डेवलपमेंट रुकेगा। CJI ने आगे कहा, राज्य घाटे में चल रहे हैं लेकिन फिर भी फ्रीबीज़ दे रहे हैं। देखिए, आप एक साल में जो रेवेन्यू इकट्ठा करते हैं, उसका 25 परसेंट राज्य के डेवलपमेंट के लिए क्यों नहीं इस्तेमाल किया जा सकता?”

कोर्ट ने साफ़ किया कि, यह मामला किसी एक राज्य तक ही सीमित नहीं है, बल्कि देश के सभी राज्यों से जुड़ा है।जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने कहा, हम किसी एक राज्य की बात नहीं कर रहे हैं, यह सभी राज्यों की बात है। यह प्लान्ड खर्च है। आप बजट प्रपोज़ल क्यों नहीं बनाते और यह क्यों नहीं बताते कि यह लोगों की बेरोज़गारी पर मेरा खर्च है?”

पॉलिटिकल फ़्रीबीज़ अब भारत में चुनाव जीतने की एक ज़रूरी स्ट्रैटेजी बन गए हैं।एक्विटास इन्वेस्टमेंट्स की एक रिपोर्ट बताती है कि, कैसे पॉलिटिकल पार्टियाँ वोट पाने के लिए वेलफ़ेयर स्कीम के नाम पर फ़्रीबीज़ पर तेज़ी से निर्भर हो रही है।इसमें कहा गया है, वेलफ़ेयर स्कीम और ‘फ़्रीबीज़’ सिर्फ़ चुनावी वादों से पॉलिटिकल पावर की नई करेंसी बन गए हैं। (ANI)

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