नई दिल्ली : ‘चीनीमंडी’ से बात करते हुए, नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फेडरेशन (NFCSF) के मैनेजिंग डायरेक्टर, प्रकाश नाइकनवरे ने कहा कि, पिछले सात सालों में भारत में चीनी की खपत कम हुई है। उन्होंने कहा कि, चीनी के बारे में लगातार नेगेटिव मैसेजिंग का मुकाबला चीनी पर साइंटिफिक डेटा और रिपोर्ट्स से किया जाना चाहिए, ताकि कंज्यूमर्स को निहित स्वार्थों वाले लोगों द्वारा गुमराह न किया जाए।
सवाल: क्या भारत में प्रति व्यक्ति चीनी की खपत धीमी हुई है?
जवाब: हां, भारत में प्रति व्यक्ति चीनी की खपत साल-दर-साल लगातार कम हुई है, जो 2018 में 4.1% से घटकर मौजूदा साल में 2.1% हो गई है।
सवाल: स्वास्थ्य जागरूकता ने चीनी खाने के तरीकों को कैसे बदला है?
जवाब: सोशल मीडिया पर चीनी की खपत से जुड़ी स्वास्थ्य चिंताओं के बारे में लगातार मैसेज दिए जा रहे हैं। इस ‘स्लिम-ट्रिम-जिम के दौर’ में, कुछ खुद को ‘शुगर फ्री’ कहने वाली लॉबी ने चीनी विरोधी अभियान शुरू किया है। इन सबका असर युवा कंज्यूमर्स पर चीनी का सेवन कम करने के रूप में दिख रहा है।
सवाल: क्या उत्तरी, पश्चिमी, पूर्वी और दक्षिणी भारत में क्षेत्रीय खपत के रुझान अलग-अलग हैं?
जवाब: ऐसा नहीं है। मुझे लगता है कि चीनी की खपत का जो ट्रेंड हम अभी देख रहे हैं, वह पूरे देश में एक जैसा है। इसमें कोई असमानता नहीं है।
सवाल: भारत में चीनी की खपत बढ़ाने के लिए मिल और सरकारी स्तर पर क्या पहल की जानी चाहिए?
जवाब: चीनी और इसके स्वास्थ्य से जुड़े मिथकों के खिलाफ साइंटिफिक डेटा/रिपोर्ट्स के आधार पर एक व्यवस्थित अभियान चलाने की ज़रूरत है। सोशल मीडिया पर हम जो चीनी विरोधी मैसेज देखते हैं, वे साइंटिफिक नहीं हैं और डॉक्टरों द्वारा समर्थित नहीं हैं। इससे कंज्यूमर्स को स्थायी नुकसान हो सकता है। चीनी एक जरूरी पोषक तत्व है, लेकिन सीमित मात्रा में। हमें एक लगातार अभियान की ज़रूरत है।
सवाल: मौजूदा सीजन में भारत में चीनी की अनुमानित खपत कितनी है?
जवाब : मौजूदा सीजन में चीनी की खपत 285-290 LMT होने का अनुमान है।

















