नई दिल्ली : केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंगलवार को पिछली UPA सरकार पर निशाना साधा और ज़्यादा उत्पादन वाले सालों में चीनी और खेती की पॉलिसी को संभालने के उनके तरीके पर सवाल उठाए। 2006-07 में रिकॉर्ड चीनी उत्पादन का ज़िक्र करते हुए, चौहान ने पूछा कि जब बाद में कीमतें गिर गईं तो किसानों को बचाने के लिए उस समय कोई बफ़र स्टॉक क्यों नहीं बनाया गया। द टाइम्स ऑफ़ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने 36 रुपये प्रति kg पर चीनी आयात करने और 12.50 रुपये प्रति kg पर निर्यात करने के लॉजिक पर भी सवाल उठाया।
मंत्री ने स्वामीनाथन कमेटी की सिफारिशों को लागू न करने के UPA के फैसले पर भी चिंता जताई, जिसमें प्रोडक्शन कॉस्ट से 50 परसेंट ज़्यादा मिनिमम सपोर्ट प्राइस (MSP) तय करने का प्रस्ताव था। उन्होंने कहा कि, उस समय की सरकार ने एक एफिडेविट में कहा था कि इस तरह के कदम से मार्केट में गड़बड़ी होगी। चौहान ने कहा कि, यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी थे, जिन्होंने बाद में प्रोडक्शन कॉस्ट से 50 परसेंट ज़्यादा पर MSP पक्का करने का फैसला किया।
उन्होंने आगे दावा किया कि, 1993-94 तक भारत खाने के तेलों के मामले में काफी हद तक आत्मनिर्भर था, लेकिन कांग्रेस की सरकार के खाने के तेलों को ओपन जनरल लाइसेंस सिस्टम के तहत लाने के बाद आयात पर निर्भरता बढ़ गई।मंत्री चौहान ने यह भी आरोप लगाया कि, सुप्रीम कोर्ट के गरीबों में बांटने का सुझाव देने के बावजूद, बड़ी मात्रा में अनाज गोदामों में बिना इस्तेमाल के पड़ा हुआ था। उन्होंने दावा किया कि UPA सरकार ने कोर्ट के दखल का विरोध किया और कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी को इन मुद्दों पर जवाब देना चाहिए।


















