मंदी की चपेट: औरंगाबाद में 50 हजार श्रमिकों ने गंवाई नौकरी…

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औरंगाबाद : चीनी मंडी

वैश्विक मंदी ने हमारे देश में भी दस्तक दी है, और इसके विपरीत परिणाम भी दिखाई दे रहे है। हाल ही में औरंगाबाद में लगभग 50 हजार श्रमिकों को अपनी नौकरी गवानी पड़ी है। वालुज, चिकलठाणा, शेंद्रे, रेलवे स्टेशन और चित्तेगाव के औद्योगिक क्षेत्रों में विभिन्न प्रकार के लगभग 2000 से ज्यादा उद्योग है और साढ़े चार लाख श्रमिक है। श्रमिक नेता उद्धव भावलकर ने कहा है की कई उद्योग बंद हो गए है और पिछले पंधरा दिनों में लगभग 50 हजार श्रमिकों को नौकरी से हाथ धोना पड़ा है। आनेवाले दिनों में और कई हजार श्रमिकों को अपनी नौकरी गवानी पड़ सकती है।

वैश्विक मंदी का औद्योगिक क्षेत्र पे गहरा प्रभाव पड़ा है और ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री सबसे ज्यादा प्रभावित हुई है। हालाकि अन्य कई सारे उद्योग भी परेशानी में है। औरंगाबाद को ऑटोमोबाइल और वाईन हब के रूप में जाना जाता है। श्रमिक नेता नेता का दावा है की आज ये दोनों उद्योग संकट में है। मध्यम और छोटी कंपनियां जो बड़े उद्यमों पर निर्भर है, उन्हें मंदी का सबसे ज्यादा खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। बड़ी कंपनियों ने अगले चार महिने के लिए उत्पादन में कटौती की है। इसका सीधा असर छोटी कंपनियों पर हो रहा है।

डिस्टलरी, फार्मास्यूटिकल और टायर कंपनियां भी मंदी की चपेट में आ गई है। टायर निर्यात में बहुत गिरावट आई है। इसके अलावा वालुज, चिकलठाणा, शेंद्रे में डिस्टलरी कंपनियों से बड़ी मात्रा में बीयर विदेश जाती है, लेकिन उनके उत्पादन के निर्यात में भारी गिरावट हुई है। दशहरा, दिवाली में लोग वाहन और अन्य विभिन्न वस्तुओं की खरीद पर जोर देते है, लेकिन अब खरीददारों के रोजगार पर ही सवाल खड़ा हो गया है, ऐसा दावा किया जा रहा है।

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