घाटे के कारण बांग्लादेश में सरकारी स्वामित्व वाली 6 चीनी मिलें बंद

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ढाका: बांग्लादेश सरकार ने घाटे में चल रही 6 चीनी मिलों को बंद करने का फैसला किया है। सरकार के इस फैसले के बाद इन मिलों में काम कर रहें श्रमिकों और अधिकारियों के बीच हडकंप मच गया है, लेकिन चीनी और खाद्य उद्योग निगम (बीएसएफआईसी) ने कहा है कि, वे श्रमिकों और अधिकारीयों के वेतन का भुगतान जारी रखेंगे। इस महीने के शुरूवात में सरकार द्वारा यह फैसला लिया गया था। ‘गुरुवार को इस फैसले का पत्र संबंधित मिलों के प्रबंध निदेशकों के पास पहुंचा।

‘बीएसएफआईसी’ के चेयरमैन सनत कुमार साहा ने कहा कि, पबना शुगर मिल, श्यामपुर शुगर मिल, पंचगढ़ शुगर मिल, सेतगंज शुगर मिल, रंगपुर शुगर मिल और कुश्तिया शुगर मिल अगले सूचना तक बंद रहेगी। उन्होंने कहा कि, चीनी मिलों की उत्पादन क्षमता सहित कई कारणों से मिलें लंबे समय से घाटे में चल रही थीं। ‘सुधार और आधुनिकीकरण’ करने के लिए मिलों को अभी बंद किया जा रहा है।

सरकार की पंद्रह चीनी मिलों को कई कारणों से हर साल लगभग 10 बिलियन TK का घाटा हो रहा हैं, जिसमें अतिरिक्त श्रमशक्ति, मशीनरी की बिगड़ती स्थिति, कच्चे माल की कमी, दीर्घकालिक बैंक ऋणों पर बढ़ता ब्याज शामिल हैं। निजी रिफाइनरियों में उत्पादित सफेद चीनी बाजार में 60 से 80 Tk प्रति किलोग्राम पर उपलब्ध है, जबकि सरकारी मिलों में उत्पादित चीनी की कीमत इससे कई ज्यादा है। कर्ज में डूबे मिलों को भी समय पर गन्ना किसानों को अपना ऋण निपटाने में कठिनाई हो रही है। ‘बीएसएफआईसी’ के अनुसार, वित्त वर्ष 2019-20 में चीनी मिलों ने Tk 9.7 बिलियन का घाटा उठाया। पिछले पांच वर्षों में संचित घाटा Tk 39.76 बिलियन रहा।

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