आठ मिलों ने कोटे से अधिक चीनी बेची; होगी कड़ी करवाई 

 

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मुंबई : चीनी मंडी

महाराष्ट्र में कम से कम आठ चीनी मिलें निर्धारित सीमा से अधिक मात्रा में चीनी बेचने के लिए सवालों के घेरे में हैं। चीनी आयुक्त कार्यालय ने बताया की, राज्य की 195 चीनी मिलों में से 10 मिलों ने उनके निर्धारित बिक्री कोटा का 100% से अधिक चीनी बेची थी, इसके कारण अन्य मिलरों ने संदेह जताया कि ये मिलें ऐसा कैसे कर पा रही हैं, जब अन्य लोग अपने उत्पाद के लिए खरीदार नहीं खोज पा रहे थे। जांच में पता चला है कि इन 10 मिलों में से 8 ने अपने आवंटित कोटा से अधिक की बिक्री की थी और इस मामले की रिपोर्ट केंद्र सरकार को दी जाएगी।

सरकार द्वाराउन‘ मिलों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश
पिछले साल, अधिशेष चीनी की समस्या से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने चीनी क्षेत्र में रिलीज तंत्र को लागू किया था और चीनी की आपूर्ति को नियंत्रित करने और कीमतों को स्थिर रखने के लिए हर एक मिल के लिए एक मासिक बिक्री कोटा तय किया था। केंद्र सरकार ने चीनी के न्यूनतम बिक्री मूल्य (एमएसपी) को भी 3,100 रूपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया था और मिलों को निर्देश का पालन करने को कहा था। केंद्र सरकार ने राज्यों के गन्ना आयुक्तों को सरकार द्वारा अनिवार्य मूल्य से कम चीनी बेचने वाली मिलों के खिलाफ कार्रवाई करने का निर्देश दिया था। चीनी मिलें नकदी संकट का सामना कर रही थीं, वह किसानों को उचित और पारिश्रमिक मूल्य (एफआरपी) का भुगतान करने में भी नाकाम रही। घरेलू और वैश्विक बाजार में चीनी ठप्प हुई बिक्री के कारण महाराष्ट्र में, गन्ना बकाया राशि लगभग 5,000 करोड़ के आसपास पहुंची है।

ब्लैकलिस्ट हो सकती है कई मिलें
गन्ना आयुक्तों को एफआरपी का भुगतान करने के लिए धन जुटाने के लिए एमएसपी के नीचे अपना स्टॉक बेचने वाली मिलों के बारे में कई शिकायतें मिलीं। ऐसी शिकायतों का जवाब देते हुए, गायकवाड़ ने कुछ मिलों की बिक्री रिपोर्ट का ऑडिट करने का आदेश दिया, जिन पर कम दाम में तय कोटा से ज्यादा चीनी बेचने का संदेह था। ऑडिट के दौरान, आठ मिलों ने कोटा उल्लंघन और निर्धारित स्टॉक से अधिक चीनी बेचने का मामला सामने आया है। अब इन दोषी मिलों को सुनवाई के लिए बुलाया जाएगा और इन मिलें को आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत दंडात्मक कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता हैं। इस तरह की मिलों को सॉफ्ट लोन स्कीम, एक्सपोर्ट सब्सिडी सहित विभिन्न सरकारी योजनाओं से लाभ प्राप्त करने से ब्लैकलिस्ट किया जा सकता है।

 

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