श्रीलंका में चीनी मिलों के लिए खुले अतिरिक्त आमदनी के विकल्प

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कोलम्बो, 22 फरवरी: श्रीलंका में कृषि, पशुपालन और मत्स्य पालन ग्रामीण आबादी को रोजगार देने का महत्वपूर्ण आधार है। यहाँ के 25 जिलों के अधिकाशं तालुको में खेती के साथ-साथ पशुपालन किसानों की आजीविका का महत्वपूर्ण व्यवसाय है। बीते सालो मे यहां कृषि में रसायनों के बढते प्रयोग से जानवरों के दुग्ध उत्पादन में जहां गिरावट आयी है वहीं मृदा ऊर्वरता कम होने से गन्ना किसानों को खेती में उपज कम होने से आर्थिक तंगी का सामना भी करना पड रहा है। प्रदेश के बदुला, करुनागला, अमपारा, और मोनेरागाला दुले जैसे जिलों में चल रही चीनी मिलें गन्ना किसानों का पैसा चुकाने की स्थिति में नहीं रही है। गन्ना किसानोे, पशुपालकों और चीनी मिलों की इसी समस्या के निदान के लिए श्रीलंका सरकार के पशुपालन व मत्स्य पालन मंत्री डोगलस देवानन्दा, और कृषि मंत्री
दुमिन्दा दिशानायके ने मंत्रालय से जुडे विशेषज्ञों की बैठक बुलाई।

कृषि मंत्री की अध्यक्षता में हुई बैठक में श्रीलंका के पैराडेनिया विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर कृषि संस्थान के विभागाध्यक्ष, डॉ एमपी सामारासिंगे ने कहा कि सरकार अगर सहमति दे गन्ने के वेस्टेज को उपयोग में लाकर दुधारु जानवरों के लिए चारा दाना तैयार किसा जा सकता है। इससे बेकार जाने वाले मोलासिस से जहां सुगर फीड बनेगा वहीं चीनी मिलों के लिए अतिरिक्त आमदनी के विकल्प भी खुलेंगे। डॉ सामारासिंगे ने कहा कि इससे बनने वाले फीड में गुड, चीनी के अलावा गन्ने के अनुपयोगी रस को कैटल फीड में मिलाकर सुगर फीड बनाया जाएगा, उसे दुधारु पशुओ को खिलाने से उनका दुग्ध उत्पादन बढेगा तो किसानों की आमदनी में इजाफा होगा। बैठक में मौजूद पेल्वाट्टे सुगर इंडस्ट्रीज़ के अधिकारी रानिल जयसूर्या ने कहा कि इस तरह के नवाचार करने से किसानों को जहां गन्ने के अच्छे दाम मिलेंगे वहीं चीनी मिलों के लिए भी आय के श्रोत बढेंगे। इस तरह से यह काम सभी के लिए फायदेमंद रहेगा। बैठक में मौजूद प्लांटेशन इंडस्ट्रीज़ मंत्रालय के सचिव, सुधारामा कारुनाराटाने ने कहा कि इस काम के प्रति चीनी मिलों की रूचि बढाने के लिए सरकार चीनी मिलों को प्रौत्साहन के तौर पर वित्तीय मदद भी करेगी ताकि मिलें इस तरफ आकर्षित हो। बैठक में उडा वालेव स्थित गन्ना विकास संस्थान के अलावा पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के अधिकारी और अन्य प्रतिनिधि भी मौजूद थे।

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