चीनी मिलों को नेगेटिव लिस्ट से हटाने की आरबीआई को सलाह

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नई दिल्ली : चीनी मंडी

कोरोना वायरस महामारी के चलते लागूं लॉकडाउन के कारण चीनी की खपत में भारी गिरावट और किसानों के बकाया भुगतान में देरी से चीनी उद्योग पहले ही काफ़ी कठिनाईयों का सामना कर रहा है। और इसलिए भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) को सलाह दी गई है कि वह अपने नेगेटिव लिस्ट से संकटग्रस्त चीनी क्षेत्र को हटा दे।

इससे केश क्रेडिट लिमिट (CCL) के विस्तार से चीनी मिलों में ताजा तरलता और कार्यशील पूंजी के मार्ग प्रशस्त करेगा, जिससे मिलों को बकाया राशि के त्वरित निपटान की सुविधा होगी।

बिजनेस स्टैंडर्ड में प्रकाशित खबर के मुताबिक, पिछले महीने, यूपी के चीनी उद्योग और गन्ना विकास के प्रमुख सचिव संजय आर. भूसरेड्डी ने केंद्रीय वित्तीय सेवा सचिव और आरबीआई को पत्र लिखा था, लॉकडाउन के कारण चीनी मांग, आपूर्ति, भंडारण स्थान आदि चुनौतियों पर प्रकाश डाला गया था। महाराष्ट्र स्टेट कोआपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज द्वारा केंद्र सरकार को एक और पत्र लिखा गया था जिसमें दावा किया गया था कि, लॉकडाउन के कारण कोल्ड ड्रिंक / पेय उद्योग, आइसक्रीम क्षेत्र, और हलवाई की दुकानों के लिए चीनी की बिक्री काफी कम हो गई है, जिससे नकदी प्रवाह में दिक्कतें आ रही है। इन पत्रों के बाद, केंद्रीय उपभोक्ता मामलों, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय में खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग के निदेशक (चीनी नीति) विवेक शुक्ला ने वित्त मंत्रालय को लिखा है कि, वे यूपी सरकार और महाराष्ट्र मिलों के रुख पर विचार करें, और आरबीआई से अनुरोध करें की चीनी मिलों को नेगेटिव लिस्ट से हटाए, जिससे उन्हें थोड़ी राहत मिलेगी।

आइसक्रीम, कोल्डड्रिंक और चॉकलेट जैसे विविध प्रकार के उत्पादों के कन्फेक्शनरों और निर्माताओं से औद्योगिक इस्तेमाल के लिए मांग में गिरावट के कारण चीनी की बिक्री ठप है। इसके अलावा चीनी के उप-उत्पाद की बिक्री भी धीमी है जिससे चीनी मिलों के सामने राजस्व की समस्या पैदा हुई है। मार्च और अप्रैल में चीनी की बिक्री लॉकडाउन के कारण एक मिलियन टन कम थी। चीनी बिक्री न होने से चीनी मिलों के सामने गन्ना भुगतान करने की भी चिंता है।

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