महाराष्ट्र के बाद कर्नाटक में भी गन्ना FRP को किश्तों में देने के प्रस्ताव का किया जा रहा है विरोध

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बेंगलुरु: अब महाराष्ट्र के बाद कर्नाटक में भी गन्ना FRP को किश्तों में देने के प्रस्ताव का विरोध किया जा रहा है। हलाकि सरकार द्वारा यह स्पष्ट कर दिया गया है की इसे लागू नहीं किया जाएगा।

कर्नाटक गन्ना किसान संघ (Karnataka Sugarcane Cultivators Association) ने गन्ना आदेश, 1966 में प्रस्तावित संशोधन का विरोध किया है, क्योंकि प्रस्तावित संशोधन के अनुसार चीनी मिलों को किसानों को 60 दिनों में किश्तों में भुगतान करने की सुविधा दी जा रही है। पहले के आदेश के अनुसार, गन्ना खरीद के 14 दिनों के भीतर किसानों को एफआरपी का भुगतान करना अनिवार्य था। साथ ही आदेश में एक प्रावधान यह भी था जिसके अनुसार 14 दिनों की समय सीमा का पालन करने में विफलता के परिणामस्वरूप मिलों द्वारा किसानों को 15 प्रतिशत ब्याज का भुगतान करना होगा।

केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित संशोधनों का विरोध करते हुए किसान संघ के अध्यक्ष कुरबुर शांताकुमार ने कहा कि, चीनी मिलों द्वारा भुगतान में देरी के कारण किसान पहले से ही संकट में हैं। शांताकुमार ने कहा कि, किसानों को उनका हक दिलाने के लिए समर्थन देने के बजाय, सरकार एक कानून पारित करने के लिए तैयार है जो भुगतान में और देरी करेगा और मिल मालिकों की मदद करेगा।

शांताकुमार ने कहा कि, देश भर में गन्ना किसान संघ ने संशोधन का विरोध किया है। यदि केंद्र ने प्रस्तावित आदेश को कैंसिल नहीं किया तो किसान सांसदों के कार्यालयों और आवास के सामने आंदोलन करेंगे। संघ ने चालू वर्ष के लिए गन्ने के उचित और लाभकारी मूल्य के रूप में 2,900 रुपये प्रति टन तय करने के लिए केंद्र सरकार की तीखी आलोचना की। उन्होंने कहा की, केंद्र सरकार द्वारा तय की गई एफआरपी बहुत कम है और खेती की लागत को भी पूरा नहीं करता है।

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