इथेनाल ब्लेंडिंग लक्ष्य: इथेनाल इकाइयों की स्थापना की दिशा में सरकार द्वारा कई नीतिगत प्रयास किये जा रहे हैं

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कानपूर: राष्ट्रीय शर्करा संस्थान, कानपुर और साउथ इंडियन शुगरकेन एवं शुगर टेक्नोलाजिस्ट्स एसोसियेशन के संयुक्त तत्वावधान में आज दि. 15.6.2021 को “Standardization of Ethanol Plant Capacities and Models of Sugar Diversion” विषय पर एक वेबीनार का आयोजन किया गया। इस वेबीनार में भारत के समस्त अग्रणी चीनी उत्पादक राज्यों से बड़ी संख्या में प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।

वेबीनार का उद्घाटन करते हुए श्री सुबोध कुमार सिंह, संयुक्त सचिव (शर्करा और प्रशासन), भारत सरकार ने बताया कि वर्ष 2020-21 में भारत सरकार द्वारा 551 बिलियन डालर (विदेशी मुद्रा) खर्च करके 185 मिलियन टन पेट्रोलियम का आयात किया गया। उन्होने कहा कि इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए कि सड़क परिवहन क्षेत्र में ईंधन की आवश्यकता का लगभग 98% वर्तमान में जीवाश्म ईंधन से पूरा होता है और शेष केवल 2% जैव ईंधन द्वारा पूरा किया जाता है, इस दिशा में एक सफल E20 कार्यक्रम देश को पर्याप्त मात्रा में ईंधन के उत्पादन द्वारा विदेशी मुद्रा के खर्च से बचा सकता है। श्री सिंह ने आगे कहा कि वर्ष 2025 तक पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनाल की ब्लेंडिंग के बड़े लक्ष्य को हम प्राप्त करने में सफल हो जायेंगें। इस दिशा में लक्ष्य प्राप्ति हेतु नई इथेनाल इकाइयों की स्थापना की दिशा में सरकार द्वारा कई नीतिगत प्रयास किये जा रहे हैं। वर्तमान में भारत में मौजूदा इथेनॉल उत्पादन क्षमता 426 करोड़ लीटर है जिसका उत्पादन शीरा आधारित आसवनियों से होता है और 258 करोड़ लीटर उत्पादन अनाज पर आधारित आसवनियों से है। आगामी दो वर्षों में इस उत्पादन को बढ़ाकर क्रमशः 760 करोड़ लीटर और 740 करोड़ लीटर करना प्रस्तावित है। इससे वर्ष 2025 तक 1016 करोड़ लीटर एथेनॉल, पेट्रोल में मिश्रण के लिए तथा 334 करोड़ लीटर अन्य उपयोगों के लिए उपलब्ध होगी।

राष्ट्रीय शर्करा संस्थान, कानपुर के निदेशक, श्री नरेंद्र मोहन, ने अपने संबोधन में संयंत्र और मशीनरी की क्षमता एवं प्रकार के मानिकीकरण, उत्पादन एवं परियोजना लागत को कम करने तथा परियोजना के कम समय में पूरा करने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने गन्ने पर आधारित कच्चे माल से इथेनॉल उत्पादन के लिए विभिन्न व्यावसायिक मॉडल प्रस्तुत किए यदा ‘सी’ एवं ‘बी’ हैवी सीरे, गन्ने का रस / शर्करा / शर्करा की चाशनी और चावल, मक्का और अन्य फ़ीड स्टॉक के माध्यम से भी इथेनाल उत्पादन पर प्रकाश डाला। उन्होन कहा कि वर्तमान इथेनॉल आपूर्ति वर्ष के दौरान हमने सर्वकालिक उच्च ब्लेंडिंग प्रतिशत 7.5 से अधिक पहले ही प्राप्त कर लिया है और इसे पूरे वर्ष के लिए समग्र रूप से 8.0 प्रतिशत प्राप्त करने की आशा रखते है। हालाँकि, हमें उपलब्धता और अर्थशास्त्र के अनुसार विविध फीड स्टॉक्स का उपयोग करके इथेनाल संयंत्रों को पूरे वर्ष के संचालन हेतु प्रयास करना होगा।

श्री चिन्नापन, उपाध्यक्ष, साउथ इंडियन शुगरकेन एवं शुगर टेक्नोलाजिस्ट्स एसोसियेशन ने अपने संबोधन में कहा कि जैव ईंधन जैसे इथेनॉल का उत्पादन विदेशी मुद्रा की बचत और चीनी उद्योग को आर्थिक स्थिरता प्रदान करने के साथ-साथ भारत में युवाओं हेतु रोजगार पैदा करने, मेक इन इंडिया, स्वच्छ भारत को बढ़ावा देने, किसानों की आय को दोगुना करने, कूडे-कचरे से धनोपार्जन में भी मदद करता है।

इस महत्वपूर्ण वेबीनार के दौरान श्री संजय देसाई, प्रबंध निदेशक, मे. एक्सेल इंडस्ट्रीज ने विभिन्न फीड स्टॉक से इथेनॉल इकाई को चलाने के लिए संयंत्र और मशीनरी के चयन पर प्रस्तुति दी। श्री देसाई ने कहा कि प्रारंभ में ऐसी इकाई की स्थापना लागत 25-35% तक अधिक हो सकती है, लेकिन तदुपरान्त विविध फीड स्टाक जैसे गन्ने के रस, सिरप, शीरा या खाद्य पदार्थो से इथेनाल का उत्पादन करके अतिरिक्त आय प्राप्त की जा सकती है।

श्री संदीप चिचबंकर, प्रबंध निदेशक, मे. कोवैलेंट इंजीनियरिंग एवं प्रोजेक्ट्स प्रा. लिमिटेड ने दक्षता से समझौता किए बिना विभिन्न फीड स्टॉक से इथेनाल निर्माण हेतु संयंत्र और मशीनरी का चयन करते समय परियोजना लागत को कम करने के विभिन्न कारकों के विवरण पर विस्तृत चर्चा की।

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