सरकार के साथ-साथ चीनी मिलें भी प्रदूषण को रोकने के लिए आगे आ रही है

196

5, नवम्बर, पंजाब: हरियाणा और उत्तर प्रदेश के किसानों द्वारा खेतों में गन्ने के अवशेष और धान की पुआल जलाने से पर्यावरण को हो रहे नुक़सान के कारण राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली सहित सम्पूर्ण एनसीआर प्रदूषण की आग़ोश में है। स्मोग की वजह से गैस चैम्बर बनी दिल्ली को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए दिल्ली सरकार वाहनों के लिए जहां ऑड इवन फ़ार्मूला अपना रही है वहीं हरियाणा सरकार ने किसानों से पराली न जलाने की अपील करते हुए सख़्त कदम उठाये है। किसानों को जागरुक करने के इस काम में प्रदेश सरकार के साथ चीनी मिलें भी आगे आ रही है। इसी क्रम में प्रदेश के सोनीपत ज़िले में सोनीपत सहकारी चीनी मिल ने शहीद भगत फूल सिंह विश्वविद्यालय के साथ मिलकर किसानों को पर्यावरण प्रदूषण के प्रति जागरुक करने के लिए किसान जागरुकता कार्यक्रम शुरु किया है। पानीपत सहकारी चीनी मिल द्वारा मिल में पंजीक्रत गन्ना किसानों को विशेष तौर पर इसमें आमंत्रित किया था। इस जागरुकता कार्यक्रम में ज़िलेभर से तक़रीबन 200 किसानों ने भाग लिया। किसानों के साथ विश्वविद्यालय के छात्रों ने भी ‘’ प्रदूषण मुक्त पानीपत’’ लिखे बैनर लेकर किसानों के साथ संवाद में अपनी भागीदारी निभाई।

इस जागरुकता कार्यक्रम में आसपास के गाँवों के किसानों ने भाग लिया जिनमें ज़्यादातर किसान गन्ना उत्पादक थे। ज़िले के लरसोली, पंछी गुजरान, पाटी ब्रह्मण,पीपली खेडा, पुगथला, राजलू, राजलू गारी, राजपुर, सनपेरा, सरदाना, सेखपुरा, टेहा और तोवारी गाँवों के तक़रीबन 125 किसानों ने भाग लिया वही 75 अन्य किसान बाक़ी जिलेभर से आए।

पानीपत सहकारी चीनी मिल के प्रबंध निदेशक प्रद्युमन सिंह ने कहा कि एनसीआर में प्रदूषण का स्तर काफ़ी बढ़ चुका है। इसके प्रति किसानों में जागरुकता के लिए हमने एक दिवसीय किसान जागरुकता कार्यक्रम का आयोजन किया है। जिसके तहत कॉलेज के छात्रों के साथ शहर में जागरुकता रैली आयोजित की गयी। इसके अलावा किसानों को पराली न जलाने के प्रति जागरूक किया गया और पर्यावरण संरक्षण के प्रति शपथ भी दिलायी गयी। सिंह ने बताया कि किसानों को धान की भूषी और गन्ने के अवशेष का फिर से उपयोग कर चीनी मिल में देने के लिये प्रेरित किया गया है। किसानों को समझाया गया कि अगर आप पराली के फसल अवशेष लेकर चीनी मिल में आएँगे तो आपको इसके बदले नगद राशि भी मिलेगी। सिंह ने कहा कि किसान भाइयों को गन्ने के अवशेषों से इथेनॉल, कम्पोष्ट खाद और बायोगैस जैसे कई उत्पाद बनाने की जानकारी भी दी गयी ।

इस अवसर पर सरदाना गाँव के किसान नथमल ने कहा कि पराली की वजह से पर्यावरण प्रदूषण न हो इसके लिए हमने प्रण लिया है कि पराली नहीं जलायेंगे। वहीं पीपली खेड़ा गाँव के किसान जयसिंह ने कहा कि चीनी मिल प्रबंधन ने कहा है कि उनकी गन्ने और धान के फसल अवशेष किसानों से वो ख़रीदेंगे तो फिर हम लोग भी पराली जलाना बंद कर देंगे। सरकार किसी भी समस्या का समाधान अगर देती है तो हमें उसे अपनाने में कोई दिक़्क़त नहीं है।

इस अवसर पर शहीद भगत फूल सिंह विश्वविद्यालय की कुलपति डॉ सुषमा यादव ने बताया कि पर्यावरण के प्रति लोगों को जागरुक करना हमारा दायित्व है। आज प्रदूषण की वजह से हर नागरिक प्रभावित हो रहा है। तमाम तरह की बीमारियाँ इसकी वजह से हो रही है। अगर समय रहते हम नहीं चेते तो वो दिन दूर नहीं जब हम खुली हवा में श्वास लेना तो मुश्किल होगा ही चैन से जीना भी दूभर हो जाएगा।

यह न्यूज़ सुनने के लिए प्ले बटन को दबाये.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here