लोकसभा चुनाव के पहले देश के गन्ना किसानों को राहत देने की कोशिश…

 

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उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र की राजनीति में गन्ना किसानों की निर्णायक भूमिका को देखते हुए केंद्र सरकार को यह कदम उठाना पड़ा है।

नई दिल्ली: चीनी मंडी

लोकसभा चुनाव में गन्ना बकाया मुद्दा विपक्षियों का हथियार बनने की सम्भावना को देखते हुए, सरकार ने गन्ना किसानों को राहत देनी की कोशिश की है। केंद्र सरकार ने उनके गन्ने के बकाया भुगतान की पक्की गारंटी सुनिश्चित की है। इसके लिए दस हजार करोड़ रुपये से अधिक का रियायती ऋण मुहैया कराने का फैसला किया गया है। लेकिन इस ऋण का उपयोग चीनी मिलें सिर्फ और सिर्फ गन्ना भुगतान में कर सकती हैं।बताते दे की, गन्ना बकाया भुगतान को लेकर किसानों में काफी आक्रोश है, इस आक्रोश का खामियाजा लोकसभा चुनाव में होने की पूरी संभावना बनी हुई थी। इसके चलते सरकार ने चीनी मिलों को सॉफ्ट लोन मुहैय्या कराने का फैसला किया है।

उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र की राजनीति में गन्ना किसानों की निर्णायक भूमिका को देखते हुए केंद्र सरकार को यह कदम उठाना पड़ा है। केंद्र के इस फैसले के क्रियान्वयन के लिए उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने भी कमर कसना शुरू कर दिया है। मिलों को पहले से ही चेतावनी जारी कर भुगतान करने का दबाव बढ़ा दिया गया है। उत्तर प्रदेश की की 30 से अधिक संसदीय सीटों पर गन्ना किसानों का राजनीतिक प्रभाव है, जहां वे चुनाव नतीजों को उलट पलट सकते हैं। भाजपा यह मौका चूकना नहीं चाहती।महाराष्ट्र में भी हालात उत्तर प्रदेश जैसे ही है, लेकिन अब सरकार के फैसले से महाराष्ट्र सरकार को भी कुछ हद तक राहत मिल सकती है।

उत्तर प्रदेश के पूर्वाचल और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में ज्यादातर चीनी मिलें हैं। प्रदेश में 40 लाख गन्ना किसान परिवार हैं, जो चुनाव में निर्णायक व अहम भूमिका निभाते रहे हैं। सभी राजनीतिक दलों की नजर उन पर रहती है। वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में केंद्र मोदी सरकार को यहां के गन्ना किसानों ने अपने वोट दोनों हाथों से उलीच कर दिया था।पश्चिमी महाराष्ट्र और मराठवाडा इलाका चीनी बेल्ट से जाना जाता है, यहाँ के राजनीती में गन्ना हमेशा ही अहम मुद्दा रहा है।

चीनी बेल्ट कहे जाने वाले पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भाजपा को सर्वाधिक 50 फीसद से भी अधिक वोट मिले थे। इसी तरह पूर्वाचल में 42 फीसद और दोआबा में 46 फीसद मत प्राप्त हुए। लेकिन मध्य उत्तर प्रदेश वाले अवध क्षेत्र जहां गन्ने की खेती नहीं होती है, वहां सबसे कम मत 39 फीसद ही प्राप्त हुए थे। इससे साफ जाहिर है कि भाजपा अपने इन मतदाताओं को किसी भी हाल में नाराज नहीं करना चाहेगी।

राष्ट्रीय स्तर पर गन्ने का बकाया जहां 20 हजार करोड़ रुपये है, जिसमें अकेले उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी 7813 करोड़ रुपये है। राज्य के कुल गन्ने का 54 फीसद का ही भुगतान किया जा सका है। जबकि पिछले साल के इसी समय तक 74 फीसद भुगतान किया जा चुका था और गन्ना एरियर 4652 करोड़ रुपये था। पिछले साल का बकाया इस बार के एरियर में जोड़ लिया जाए तो यह बढ़कर 13 हजार करोड़ हो सकता है।

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