महाराष्ट्र में निर्यात चीनी के लिए स्टेट बैंक के जरिये होगी सहायता; ‘नो-लिन’ बैंक खाते का विकल्प

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मुंबई : चीनी मंडी बैंकों के कब्जे की चीनी निर्यात के लिए राज्य बैंक के जरिये आर्थिक सहायता करने का फैसला महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने लिया है। आर्थिक कठिनाइयों में फसे चीनी उद्योग की सहायता के लिए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने खुद पहल की है। बैंक के उच्च कर्ज को केंद्र सरकार द्वारा मिलनेवाले वापस किया जाना है, इसके लिए चीनी मिले और राज्य बैंक के बीच ‘नो-लिन’ खाता खोलने का फैसला लिया गया है ।
महाराष्ट्र राज्य को 15 लाख टन चीनी निर्यात कोटा मिला है। इनमें से 10 लाख टन चीनी सहकारी चीनी मिलों द्वारा निर्यात की जाएगी; लेकिन अब तक, केवल 1 लाख टन चीनी निर्यात की जा चुकी है। चीनी की अंतरराष्ट्रीय दर और बैंकों की ऋण वापसी में लगभग 1000 से 1200 रुपये का अंतर है। बाजार में चीनी की कीमतें 1900 रुपये से 2100 रुपये  हैं; लेकिन बैंक ने अनुमानित रूप से 2800 रुपये से 2,900 रुपये की बढ़ोतरी की है। इस कीमत अंतर का भुगतान कौन करेगा यह विवाद का मुख्य मुद्दा है।
चीनी निर्यात ठप्प हुई है और चीनी की बाकी मांग रोक दी गई है। इसके चलते इस साल उतापादित होनेवाली चीनी आखिर रखेंगे कहा ? यह चिनी मिलों के सामने चिंता का विषय बना हुआ है  । निर्यात चीनी के बिना, गोदाम में चीनी रखने के लिए अभी तो बिलकुल जगह नहीं है। यही कारण है कि जल्द से जल्द सरकारी स्तर पर चीनी गोदाम से  निकालने के प्रयास किए जा रहे हैं। इसके माध्यम से, केंद्र सरकार और चीनी आयुक्तों के सहमति पत्र के साथ कारखाने और बैंक के सामूहिक ‘नो-लिन’ खाते को शुरू करने का प्रस्ताव आगे आया है।
‘नो-लिन’ खाता क्या है?
चीनी मिलें और उनको कर्जा देनेवाले बैंकों का एक संयुक्त खाता खोलना है । केंद्र सरकार ने चीनी निर्यात करने के लिए सब्सिडी की घोषणा की है,  यह अनुदान सीधे इस खाते में जमा किया जाएगा। खाते पर अर्जित धन का उपयोग केवल बैंकों को निर्यात चीनी जारी करने के लिए दिए गए ऋणों के पुनर्भुगतान के लिए किया जाना चाहिए।
SOURCEChiniMandi

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