भारत की चीनी सब्सिडी को मात देने के लिए ऑस्ट्रेलिया और ब्राजील ने मिलाए हाथ!

नई दिल्‍ली : चीनी मंडी

ऑस्ट्रेलिया और ब्राजील के चीनी उद्योग लॉबी ने भारत के चीनी निर्यात पर सब्सिडी लागू करने के प्रयासों के खिलाफ लड़ने के लिए अपनी सरकारों के समर्थन के साथ मिलकर काम शुरू किया है। ऑस्ट्रेलिया और ब्राजील इस मुद्दे को कितनी गंभीरता से ले रहे हैं, यह उनके द्वारा विश्‍व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) को औपचारिक शिकायत से साफ दिखाई दे रहा है । दोनों देश चीनी उत्पादन को अपने सकल घरेलू उत्पाद का एक महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में देखते हैं।

चीनी सब्सिडी दरों की असमानता का कारण

ब्राजील के चीनी उद्योगयूनिका के कार्यकारी निदेशक एडुआर्डो लीओ ने कहा कि, भारत द्वारा चीनी उद्योग को बढावा देने के लिए उठाए जा रहे कदम को, ब्राजील और ऑस्ट्रेलिया दोनों देश स्वयं के चीनी उत्पादकों के लिए खतरे के रूप में देखते हैं। भारत ने किसानों के लिए चीनी की कीमत बढाने की इजाजत दी है, जो इस क्षेत्र के विकास में गंभीर जोखिम पैदा करेगा। लीओ ने रॉयटर्स से बात करते हुए कहा कि, भारत द्वारा किसी भी कदम का सामना करने के लिए डब्ल्यूटीओ की ओर से ठोस कदम एठाना आवश्यक है, क्यों की भारत द्वारा लागू की गई चीनी सब्सिडी विश्‍व बाजार में दरों की असमानता का कारण बनती है।

…अन्य देशों के गन्‍ना किसानों को खामीयाजा

गन्‍ने की बड़ी फसल पैदावार के कारण, भारत स्थानीय बाजार के साथ साथ अतिरिक्‍त चीनी की खपत के लिए पूरक तरीकों की तलाश में है। कई विश्लेषकों का मानना है कि, इसी तरह की पैदावार आने वाले वर्ष में होने की संभावना है और भारत एकमात्र ऐसा देश है जो वैश्विक स्तर पर किसानों के लिए निर्यात सब्सिडी देकर चीनी की वृद्धि और कीमत पर रोक लगाने की कोशीश करता है। जिससे अन्य देशों के गन्‍ना किसानों को खामीयाजा उठाना पडता है।

आंतरराष्ट्रीय बाजार मे अधिषेश चीनी की आपूर्ति

लीओ ने कहा कि , आंतरराष्ट्रीय बाजार मे अधिषेश चीनी की आपूर्ति के कारण चीनी मांग गिरने पर उनके देश के किसान कीमतों से मेल खाने के लिए संघर्ष करेंगे। चीनी की अत्याधिक आपूर्ति के कारण चीनी उद्योग हाल के वर्षों में कडा संघर्ष कर रहा हैे और भारत से आंतरराष्ट्रीय बाजार में चीनी की अतिरिक्त आपूर्ति से विश्‍वभर के चीनी उद्योग की हालत और भी खस्ता हो गई है। इससे जीस देश के किसान पीड़ित हो रहे है, वे कार्रवाई करने की सोच रहे हैं।

चीनी की कीमतों ने हाल ही में सबसे निचला स्तर भी देखा है, न्यूयॉर्क वायदा बाजार में कच्चे चीनी का मूल्य अगस्त के अंत में 9.91 अमेरिकी सेंट तक निचे गिर गया था।

भारत द्वारा डब्ल्यूटीओ नियमों का सम्मान

भारतीय अधिकारियों ने कहा कि, उन्हें अपने देश के चीनी निर्यात और सब्सिडी के दृष्टिकोण के साथ कोई भी गलत मुद्दा नहीं दिखता है और उन्होने दावा कीया की, यह डब्ल्यूटीओ नियमों की भी अनदेखी बिल्कुल नही करता। उन्होंने इस तथ्य का हवाला देते हुए कहा कि, भारत अपने किसानों के लिए गन्‍ने का उत्पादन करने के लिए सब्सिडी प्रदान कर रहा है और विदेशी बाजारों पर चीनी निर्यात के लिए अपने किसानों को भुगतान करने का कोई प्रयास नहीं कर रहा है।

चीनी उत्पादकों को प्रोत्साहन अनावश्यक : लिओ

लीओ ने पुष्टि की कि,ब्राजील और ऑस्ट्रेलिया डब्ल्यूटीओ के संयुक्त प्रतिक्रिया के बारे में ऑस्ट्रेलियाई चीनी मिलिंग काउंसिल से बात कर रहे हैं और कहा है कि यूरोप, थाईलैंड और भारत में बड़े उत्पादन ने विश्‍व बाजार को गिरा दिया था, फिर से यह स्थिर हो गया है । लीओ भारत के चीनी उत्पादकों को प्रोत्साहन देने के कदम को अनावश्यक मानते हैं।

10 मिलियन टन की चीनी अधिशेष के साथ, भारत को फसल की बड़ी बकाया भुगतान के लिए समाधान ढूंढना होगा, जो वर्तमान में लाभ के लिए संघर्ष करेंगे, लेकिन इसके लिए इस कदमों से आहत डब्ल्यूटीओ सदस्यों के साथ बातचीत करनी होगी।

भारत अपनी चीनी मिलों को पुनर्जीवित करने के लिए अतिरिक्त निर्यात निधि का उपयोग करने की योजना बना रहा है। लीओ ने कहा की, हम इससे सहानुभूति रखते हैं और यदि भारत सब्सिडी सिस्टीम से बच सकता है, तो ब्राजील सरकार भारत की मिलों में सुधार करने में मदद करने के लिए योजनाओं का स्वागत करेगी ।

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