बांग्लादेश: दो साल में चीनी मिलों के आधुनिकीकरण में कोई प्रगति नहीं

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ढाका : बांग्लादेश में चीनी मिलों के आधुनिकीकरण को लेकर अभी तक कोई भी ठोस कदम नहीं उठाया गया है। पिछले दो साल से नई मशीनरी और प्रौद्योगिकी को स्थापित करने में कोई प्रगति नहीं देखी गई है। आपको बता दे की, बांग्लादेश चीनी और खाद्य उद्योग निगम (बीएसएफआईसी) और उद्योग मंत्रालय के अधिकारियों को बंद मिलों के उन्नयन के बारे में बहुत कम जानकारी है। सरकार ने 2019 में आधुनिकीकरण करने का ऐलान किया था।

बीएसएफआईसी ने दिसंबर 2020 में राज्य के स्वामित्व वाली 15 में से छह मिलों में अनिश्चित काल के लिए उत्पादन रोक दिया है। बंद मिलों में पबना चीनी मिल, श्यामपुर चीनी मिल, पंचगढ़ चीनी मिल, सेताबगंज चीनी मिल, रंगपुर चीनी मिल और कुश्तिया चीनी मिल शामिल हैं।वित्तीय वर्ष 2021 तक पिछले पांच वर्षों में, बीएसएफआईसी को 40 अरब रुपये का घाटा हुआ। बांग्लादेश को सालाना घरेलू मांग को पूरा करने के लिए 1.8 मिलियन टन चीनी की जरूरत है। लेकिन घरेलू मिलों का योगदान घटकर लगभग 80,000 टन रह गया है। हालांकि एक दशक पहले चीनी उत्पादन लगभग 2 मिलियन तक होता था, लेकिन उच्च उत्पादन लागत के साथ पुरानी उत्पादन तकनीक ने निगम के बैलेंस शीट पर नकारात्मक प्रभाव डाला।

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