बैंकों से सरकार को मिल सकती है ₹3 लाख करोड़ की ‘अच्छी खबर’

सरकार को उम्मीद है कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक मौजूदा वित्त वर्ष में अपने बैड लोन का आंकड़ा 3 लाख करोड़ रुपये तक कम कर लेंगे। सरकार को उम्मीद है कि बैड लोन में अधिकांश कमी बैंकरप्सी कोड के तहत रिजॉल्यूशन के जरिए होगी। फाइनैंस मिनिस्ट्री के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि सरकारी बैंकों को और पैसा देने की कोई जरूरत नहीं है क्योंकि वे नॉन-कोर एसेट्स बेचकर संसाधन जुटा लेंगे और अपना कामकाज बेहतर

अधिकारी ने कहा, ‘कुछ मामलों में प्रमोटरों ने इस डर से कर्ज चुकाना शुरू कर दिया है कि कहीं उनके हाथ से उनकी कंपनी निकल न जाए। इसके चलते कर्ज में कमी आ रही है।’

अब तक बैंकरप्सी कोड के तहत आरबीआई की ओर से दी गई 12 कंपनियों में से केवल भूषण स्टील का मामला सुलझा है। आरबीआई ने इन 12 बड़े अकाउंट्स की लिस्ट जून 2017 में दी थी।

तब सरकार ने कहा था कि इससे सरकारी बैंकों के एनपीए में 35000 करोड़ रुपये की कमी आएगी और राइट बैक से सरकारी बैंकों को लगभग 7500 करोड़ रुपये की इनकम होगी।

अधिकारी ने बिनानी सीमेंट का उदाहरण देते हुए कहा, ‘कुछ मामलों में बैंकों को फंसे हुए कर्ज से ज्यादा रकम मिलने की उम्मीद है।’ बिनानी सीमेंट मामले में लेंडर्स को 6851 करोड़ रुपये मिलने की उम्मीद है, जबकि उन्होंने 6313 करोड़ रुपये का दावा किया है।

अधिकारी ने कहा कि जिन मामलों में बैंकों को फंसे हुए कर्ज से कम पर राजी होना पड़ा है, उनमें भी उनके पास कुछ इक्विटी होल्डिंग है, जिससे उन्हें तब ज्यादा रिटर्न मिलेगा, जब कंपनी कर्ज घटा लेगी और उसका वैल्यूएशन चढ़ जाएगा। उन्होंने कहा, ‘मॉनेट इस्पात में लेंडर्स के पास करीब 18 पर्सेंट इक्विटी स्टेक होगा।’

फाइनैंस मिनिस्ट्री के एक अन्य अधिकारी ने कहा कि जितनी रकम का पहले प्रस्ताव किया जा चुका है, सरकार उससे अतिरिक्त रकम सरकारी बैंकों को देने पर विचार नहीं कर रही है। उन्होंने कहा, ‘एनपीए घटने से बैंकों की पूंजी बढ़ेगी और वे ज्यादा कर्ज दे सकेंगे। एनपीए के सभी बड़े मामलों को इस क्वॉर्टर के दौरान शामिल कर लिया गया है, लिहाजा आने वाली तिमाहियों में इसमें अचानक कोई बड़ी बढ़ोतरी नहीं होने वाली है।’

सरकार फाइनैंशल इयर 2018-19 तक सरकारी बैंकों को 1.53 लाख करोड़ रुपये देने वाली है। इसमें से वह अब तक लगभग 88000 करोड़ रुपये दे चुकी है।

अधिकारी ने कहा, ‘बैंक मार्केट से पूंजी जुटाने पर गौर कर रहे हैं। वे अपनी नॉन-कोर एसेट्स बेचने पर भी विचार कर रहे हैं। लिहाजा हमारा अनुमान यह है कि उन्हें इस वित्त वर्ष में 65000 करोड़ रुपये से ज्यादा की जरूरत नहीं होगी।’

अधिकतर सरकारी बैंकों ने वित्त वर्ष 2017-18 के आखिरी क्वॉर्टर में घाटा दर्ज किया है। बाजार का अनुमान है कि सरकारी बैंकों का कुल घाटा 50000 करोड़ रुपये से ज्यादा हो सकता है।

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