बिहार: इथेनॉल नीति का उद्योग निकायों, किसानों ने किया स्वागत

पटना : राज्य मंत्रिमंडल द्वारा मंगलवार को इथेनॉल उत्पादन संवर्धन नीति – 2021 की मंजूरी को बिहार के व्यापार और उद्योग निकायों के साथ-साथ राज्य के किसानों से काफी हद तक सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली। विशेषज्ञों ने कहा कि, यह नीति इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (ईबीपी) को बढ़ावा देकर प्रदूषण को कम करने में मदद करेगी। राज्य इथेनॉल नीति अब मक्का की अधिशेष मात्रा से इथेनॉल उत्पादन को अनुमति देगी, जो पहले केवल गन्ने तक सीमित था।

वर्तमान में, देश में पेट्रोल में इथेनॉल सम्मिश्रण 10% है, और सरकार ने 2030 तक 20% सम्मिश्रण का लक्ष्य रखा है। तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) ने सरकार द्वारा निर्धारित कीमतों पर घरेलू स्रोतों से इथेनॉल की खरीद की है, जो गन्ना उद्योग को बढ़ावा देता है और अब राज्य में मक्का किसानों को भी लाभ देगा। बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष अशोक कुमार घोष ने कहा कि, ईबीपी के उपयोग से प्राकृतिक पेट्रोलियम संसाधनों की कमी को कम करने में मदद मिलेगी।

द टाइम्स ऑफ इंडिया में प्रकाशित खबर के मुताबिक, बिहार चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज (BCCI) के उपाध्यक्ष एन के ठाकुर ने दावा किया कि, इथेनॉल उत्पादन संवर्धन नीति – 2021 लाभकारी होगी और बिहार की समग्र अर्थव्यवस्था को एक प्रमुख बढ़ावा देगी। उन्होंने कहा, हम मानते हैं कि इस नीति से राज्य के लोगों के लिए रोजगार सृजन की काफी संभावनाएं हैं। कोसी और सीमांचल क्षेत्रों में मक्का का अधिशेष उत्पादन अब बर्बाद नहीं होगा और इसका प्रभावी ढंग से उपयोग किया जा सकता है। बिहार उद्यमी संघ (बीईए) के महासचिव अभिषेक सिंह ने कहा, रोजगार सृजन के अलावा, इथेनॉल नीति एक सकारात्मक संदेश देती है कि राज्य निवेशक-अनुकूल नीति बना सकता है।

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