चीनी उद्योग को मिलेगी राहत : देश में ‘जैव ईंधन’ युग का आरंभ …

904

नई दिल्ली : चीनीमंडी

जब पिछले साल भारत में पहली बार विमान ने जैव ईंधन का उपयोग करके उड़ान भरी, उसी समय देश की ‘जैव ईंधन’ में बढती रूचि और गंभीर प्रयासों का विश्वस्तर पर सराहना हुई। अब टिव्हीएस कंपनी ने इथेनॉल पर चलनेवाली मोटरबाइक मार्केट में लाकर इस क्षेत्र में बढ़त बनाई है। ऐसी ही एक खुशी केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने भी दी। उन्होंने कहा कि, वह देश में एक इथेनॉल पंप शुरू करने के लिए तैयार हैं और इसके लिए तेल और गैस विभाग से अनुरोध करेंगे।

आपको बता दे अधिक इथेनॉल उत्पादन से और उसके उपयोग से चीनी उद्योग को बहुत फायदा होगा। एक तो देश में अधिशेष चीनी समस्या से निजात मिलेगा और दूसरा चीनी मिलों को राजस्व भी प्राप्त होगा।

गडकरी के बयान से पर्यावरण रक्षा से जुड़े सभी लोगों में खुशी है, लेकिन ‘तेल लॉबी’ इससे नाखुश हुई होगी। गडकरी का इथेनॉल के प्रति प्रेम कभी छिपा नहीं है। चीनी उद्योग को करीब से जानने के बाद से, वे इथेनॉल के प्यार में हैं। वे हमेशा बैठकों में बताते हैं कि, इथेनॉल ही देश का भविष्य और किसानों के हित में है। आज हमें पेट्रोल में 10% इथेनॉल मिलाने की अनुमति है और इस मात्रा को बढ़ाना गडकरी का सपना है।

उत्तर प्रदेश समेत पंजाब, कर्नाटक और महाराष्ट्र में उच्च गन्ना उत्पादन होता है। गन्ना उत्पादित राज्यों में इथेनॉल का बड़ा उत्पादन हो सकता है। इथेनॉल में ऑक्सीजन की मात्रा 35 प्रतिशत होती है और नाइट्रोजन ऑक्साइड उत्सर्जन को कम किया जा सकता है। इससे प्रदूषण कम होता है। ब्राजील में पिछले 40 सालों से बायोटेक पर कारें चल रही हैं। इथेनॉल बायोडिग्रेडेबल है; इसके साथ ही यह परिवहन और बचाने के लिए सुरक्षित है। भारत में भी कुछ कंपनियों ने डीजल कारों के उत्पादन से विराम ले लिया है।

इथेनॉल की दर 52 रुपये प्रति लीटर है, जो कि पेट्रोल से सस्ता है। वर्तमान में देश में इथेनॉल का बाजार 11,000 करोड़ रुपये का है, और इसके बढ़कर 20,000 करोड़ रुपये होने की संभावना है। ऐसे हालात में निश्चित रूप से देश में इथेनॉल पंप मौजूद होंगे, यह आवश्यक भी है। इस पंप को संचालित करने में सक्षम होने के लिए, पहले ‘पेट्रोल लॉबी’ के ‘प्रदूषण’ को पहले रोकना होगा।

यह न्यूज़ सुनने के लिए इमेज के निचे के बटन को दबाये

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here