ब्राजील, भारतीय चीनी उद्योग बड़े पैमाने पर हो रहा है इथेनॉल में स्थानांतरित

नई दिल्ली : चीनी मंडी  
भारतीय चीनी उद्योग उत्पादन चक्र में इस साल 10 साल की चोटी पर पहुँच ने जा रहा है।  भारत इस साल दुनिया में चीनी का शीर्ष उत्पादक ब्राजील को पीछे छोड़कर नंबर एक तमगा हासिल करने का अनुमान जताया जा रहा है। अधिशेष चीनी की समस्या में उलझा चीनी उद्योग केंद्र सरकार के समर्थन के कारण बड़े पैमाने पर इथेनॉल में स्थानांतरित हो रहा है और अगले वर्ष से ज्यादा चीनी निर्यात करने की स्थिति में नहीं होगा। इससे बाजार में आयात – निर्यात में अंतर आएगा और चीनी की कीमते और बढ़ेगी।
ब्राजील का इथेनॉल उत्पादन को बढ़ावा देना का फैसला…
चीनी स्टॉक, इथेनॉल और अस्थायी आपूर्ति मांग असंतुलन के  कई कारक हैं। जिसमे ब्राजील प्रमुख कारक है, जिसने इथेनॉल उत्पादन को बढ़ावा देना का फैसला किया है, और चीनी का पर्याप्त उत्पादन नहीं कर रहा है। भारत 32 लाख मेट्रिक  टन चीनी उत्पादन करके दुनिया का सबसे बड़ा उत्पादक बन गया है, जबकि ब्राजील 36 लाख मेट्रिक टन  उत्पादन करता था, लेकिन ब्राजील के उत्पादन में लगभग 5 से 6 लाख मेट्रिक टन घटा है, इसका मतलब है कि विश्व बाजार अधिशेष होने से अधिक संतुलित होने जा रहा है। दूसरा मुद्दा सबसे बड़ा उत्पादक भारत है, जो सरकार के समर्थन के कारण बड़े पैमाने पर इथेनॉल में स्थानांतरित हो रहा है।
भारत से भी अगले साल जादा चीनी निर्यात नही होगी…
चीनी की जगह इथेनॉल में स्थानांतरित होने से भारत अगले वर्ष से ज्यादा चीनी निर्यात करने की स्थिति में नहीं होगा। देश में बहुत सारा गन्ना उत्पादन इथेनॉल में परिवर्तित हो रहा है और चीनी के लिए सरकार से समर्थन और निर्यात के लिए समर्थन भी है। सरकार के इस कदम से चीनी उद्योग घाटे से संतुलन में आ रहे हैं। यह 10 साल का उत्पादन चक्र है, और हम 10 साल की चोटी के पास हैं।
इथेनॉल के उच्च मिश्रण से चीनी उत्पादन में होगा कमी…
इथेनॉल के उच्च मिश्रण से अल्पावधि में 2 लाख मेट्रिक टन चीनी कम हो सकती है और शायद इससे अधिक अवधि में इससे अधिक हो सकता है। भारतीय चीनी उत्पादन खपत के साथ संतुलन आ जाएगा । इथेनॉल का उच्च मिश्रण एक अच्छा कार्यक्रम है और सरकार ने इस बार एक व्यापक कार्यक्रम दिया है । सरकार  इथेनॉल के लिए प्रोत्साहन दे रहा हैं, और तो और चीनी निर्यात के लिए भी प्रोत्साहन दे रहे हैं, जो चीनई उद्योग के ज्यादातर मुद्दों का समाधान होगा। देश में इस समय लगभग 10 लाख टन चीनी स्टॉक है और 2 लाख टन का निर्यात वास्तव में कमी पैदा करने वाला नहीं है।

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