चीनी की बंपर पैदावार मिलों के लिए मुसीबत बन गई है

लखनऊ : चीनी मंडी

पिछले साल चीनी की बंपर पैदावार मिलों के लिए मुसीबत बन गई है। बिजनौर जिले की चीनी मिलों के पास पिछले साल की 16.11 लाख क्विंटल चीनी अब भी गोदामों में रखी है। नया पेराई सत्र शुरू होने के बाद से नया स्टॉक भी मिलों के गोदामों में बढ़ने लगा है। पिछले साल की चीनी को बेचना मिलों के लिए  मुश्किल हो रहा है। उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र में भी चीनी मिलों के सामने चीनी रखने की समस्या है ।

पिछले साल  बिजनौर जिले की चीनी मिलों में पहली बार दस करोड़ क्विंटल से ज्यादा गन्ने की पेराई की थी। पिछले साल जिले में 126.43 लाख क्विंटल चीनी का उत्पादन हुआ था। जिले की चीनी मिलों के गोदाम चीनी से भर गए और चीनी के दाम तेजी से गिर गये ।  चीनी के दाम भी 2500 रुपये प्रति क्विंटल से भी नीचे गिर गए थे। इसके बाद केंद्र सरकार ने चीनी का न्यूनतम मूल्य 2900 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित करते हुए चीनी का कोटा निर्धारित किया था। पिछले साल चीनी का इतना बंपर उत्पादन हुआ था कि अब तक भी मिलों के गोदामों में पिछले साल की चीनी भरी पड़ी है। हालांकि इस साल गन्ने की पैदावार कम होने से चीनी का उत्पादन पिछले साल से कम होने का अनुमान है।   चीनी के दामों में वर्तमान पेराई सत्र शुरू होने के बाद से करीब 100 रुपये प्रति क्विंटल का उछाल आया है। नवंबर में चीनी के दाम तीन हजार रुपये प्रति क्विंटल थे। वर्तमान में चीनी के दाम 3100 रुपये प्रति क्विंटल तक चल रहे हैं।

 

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