केंद्र सरकार ने इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल कार्यक्रम की समय सीमा बढ़ाई…

गन्ने के रस के साथ-साथ मक्का, जवार, बाजरा और फल / सब्जी अपशिष्ट से होगा इथेनॉल ईंधन उत्पादन

नई दिल्ली : चीनी मंडी

केंद्र सरकार ने मक्का, जवार, बाजरा और फल / सब्जी अपशिष्ट से ईंधन उत्पादन के लिए इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (ईबीपी) कार्यक्रम की समय सीमा बढ़ा दी है। सरकार द्वारा यह निर्णय सोमवार को लिया गया और इथेनॉल आपूर्ति वर्ष 2018-19 के लिए खरीद के लिए लागू होगा। अब तक, ईंधन मिश्रण कार्यक्रम के तहत खरीद के लिए केवल अतिरिक्त गन्ने के रस को इथेनॉल में परिवर्तित करने की अनुमति थी।

एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि, इस निर्णय से किसानों को अतिरिक्त उत्पादन से अतिरिक्त पैसे कमाने और ईबीपी कार्यक्रम के लिए इथेनॉल उत्पादन के स्रोतों को बढ़ाने के लिए सक्षम किया जाएगा। जैव ईंधन 2018 की राष्ट्रीय नीति ने कृषि जैव ईंधन समन्वय समिति (एनबीसीसी) को कृषि फसल वर्ष के दौरान इथेनॉल के उत्पादन के लिए अनाज की अतिरिक्त मात्रा में रूपांतरण की अनुमति देने के लिए अधिकार दिया है।

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अनुसार, कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय के तहत कृषि, सहयोग और किसान कल्याण विभाग (डीएसी और एफडब्ल्यू) ने ईबीपी कार्यक्रम के तहत इथेनॉल के उत्पादन के लिए इथेनॉल आपूर्ति वर्ष 2018-2019 (1 दिसंबर, 2018 से 30 नवंबर, 2019) के लिए खाद्यान्न की अतिरिक्त मात्रा का अनुमान लगाया है।

बयान में कहा गया है की, यह मामला 14 नवंबर को एनबीसीसी की पहली बैठक के दौरान उठाया गया था, जिसने ईबीपी कार्यक्रम के लिए कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा इथेनॉल आपूर्ति वर्ष 2018-2019 के लिए अनुमानित मक्का, जवार और बाजरा की अधिशेष मात्रा से उत्पादित इथेनॉल की खरीद को मंजूरी दे दी है। एनबीसीसी ने ईबीपी कार्यक्रम के लिए फल और सब्जी कचरे जैसे अन्य फीडस्टॉक से इथेनॉल का उत्पादन करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दे दी है।

सरकार ने ‘ओएमसी’ के लिए लक्ष्य बढ़ाया….

ईबीपी कार्यक्रम के तहत, केंद्र ने तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) से 2022 तक पेट्रोल के साथ इथेनॉल के 10 प्रतिशत मिश्रण को लक्षित करने के लिए कहा है। हालांकि, इथेनॉल की उपलब्धता में बड़ी कमी आई है क्योंकि चीनी मिलों वर्तमान में केवल ‘सी- मोलासिस’ का ही इथेनॉल उत्पादन के लिए इस्तेमाल कर रहे है । इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन द्वारा संकलित आंकड़ों के मुताबिक, 1 अक्टूबर को इथेनॉल मिश्रण के लिए देशव्यापी औसत 4.02 प्रतिशत था। इसे ध्यान में रखते हुए, सरकार ने इस साल की शुरुआत में एक संशोधित जैव ईंधन नीति लागु की गई, जिसमे चीनी मिलों को ‘बी-मोलासिस’ और गन्ने के रस से इथेनॉल उत्पादन के लिए जादा दरें लागु की है । जिससे सरकार को उम्मीद है की बम्पर गन्ना उत्पादन और अधिशेष चीनी समस्या से निपटने के लिए काफी मदद हो सकती है और तो और किसानों की आय में भी अच्छी-खासी बढ़ोतरी हो सकती है ।

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