सोलापुर चीनी मिल केस: हाईकोर्ट का निर्देश- किसानों का भुगतान पहले करो, बाद में बैंक का

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सोलापुर : चीनी मंडी

सोलापुर के गन्ना किसानों के एफआरपी बकाया मामले में हाईकोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिया है की, पहले किसानों का बकाया भुगतान किया जाए, बाद में बैंक का लोन चुकाया जाए। बॉम्बे हाईकोर्ट के जस्टिस एन.बी. सूर्यवंशी और इंद्रजीत महंती की दो-न्यायाधीश पीठ ने सोलापुर कलेक्टर को निर्देश दिया है कि, वे बैंक ऑफ बड़ौदा का बकाया भुगतान करने से पहले गन्ना किसानों का बकाया भुगतान कर दें। सोलापुर में सिद्धेश्वर सहकारी चीनी मिल के खिलाफ चीनी आयुक्त द्वारा जारी संपत्ति जब्ती आदेश की सुनवाई के दौरान यह आदेश दिया गया।

चीनी आयुक्त शेखर गायकवाड़ ने लंबित बकाया वसूलने के लिए राजस्व वसूली संहिता के तहत संपत्ति जब्ती आदेश जारी किया था। सोलापुर कलेक्टर ने तब मिल के चीनी स्टॉक की नीलामी शुरू की थी। बैंक ऑफ बड़ौदा ने उच्च न्यायालय का रुख किया था, जिसने मिल के चीनी की नीलामी पर रोक लगाने की मांग की थी क्योंकि यह बैंक को गिरवी रख दिया गया था। महाराष्ट्र की चीनी मिलों ने बैंकों से कार्यशील पूंजी जुटाने के लिए अपना चीनी स्टॉक गिरवी रखते है। इस पैसे का उपयोग एफआरपी के साथ-साथ अन्य परिचालन खर्चों जैसे कि वेतन और गनी बैग के भुगतान के लिए किया जाता है। बैंक चीनी बिक्री से राशि की वसूली करते हैं। यदि मिलें किसानों को भुगतान करने में विफल रहती हैं, तो चीनी आयुक्त चीनी स्टॉक के नीलामी का आदेश देते है, जिसे जिला कलेक्टर द्वारा नीलाम किया जाता है। बैंकों द्वारा ऐसे आदेशों को अदालतों में चुनौती दी गई है, जो बताते हैं कि सुरक्षित लेनदारों के रूप में, उनके पास संपत्ति का पहला अधिकार है।

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