सहकारी संस्थाओं द्वारा चीनी के व्यापार को बढ़ावा दिया जाएगा: नरेन्द्र सिंह तोमर

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नई दिल्ली,12 अक्टूबर: देश मे कृषि विकास की यात्रा के आरंभिक दौर से लेकर आजतक सहकारी संगठनों की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती रही है। राजधानी दिल्ली में आयोजित देश के पहले भारत अतंर्राष्ट्रीय सहकार मेले के उद्घाटन के बाद मीडिया से बात करते हुए केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने कहा कि देश के लगभग 94 फ़ीसदी किसान किसी न किसी सहकारी संस्था से जुड़े हुए है। ऐसे मे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 2022 तक किसानो की आय को दो गुना करने के संकल्प को पूरा करने में सहकारी संस्थाएँ महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। कृषि मंत्री ने कहा कि देश में गन्ना किसानों और चीनी मिलों को मज़बूती प्रदान कराने में सहकारी संगठनों की भूमिका महत्वपूर्ण है। आने वाले दिनों में सहकारी संस्थाओं के जरिए गुड खांडसारी और चीनी के व्यापार और कारोबार को बढावा दिया जाएगा। इससे एक ओर जहाँ गन्ना किसानों को लाभ होगा वहीं चीनी के कारोबार को भी ग्रामीण स्तर पर प्रोत्साहन मिलेगा।

कृषि मंत्री ने कहा सहकारी संस्थाएँ चीनी मिलों और गन्ना किसानों के बीच सेतु का काम करती है। खेतों में खड़ा गन्ना पैराई के लिए चीनी मिलों चक पहुँचाने में सहकारी संस्थाएँ ब्रिज का काम करती है। कृषि मंत्री ने कहा कि देश के गन्ना बहुल जनपदों में काम कर रही सहकारी समितियों को सरकार वित्तीय राशि देकर मज़बूत बनाने का काम करेगी ताकि गन्ना पैराई के दौरान चीनी मिलों तक गन्ना किसानों के खेत से तय समयावधि में चीनी मिलो तक पहुँचाया जा सके। कृषि मंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश जैसे गन्ना बहुल राज्य में सहकारी समितियाँ गन्ना किसानों और चीनी मिलों के लिए एक स्पोर्टिव कैरियर का काम करती है जो चीनी मिलों को गन्ने की खेती के रकबे से लेकर उत्पादन के आँकड़ो का पैराई सत्र से पहले ही सही और सटीक आँकलन देने का काम करती है। मंत्री ने कहा कि गन्ना किसानों के बकाया की समस्या के समाधान के साथ युवाओं को रोजगार देने के लिए सहकारी समितियों को ओर मज़बूत बनाया जाएगा।
उत्तर प्रदेश से लोकसभा सांसद और बीजेपी किसान मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष वीरेन्द्र सिंह मस्त ने कहा कि चीनी और गन्ना उत्पादन के मामले में उत्तर प्रदेश को देश के अग्रणी राज्य के तौर पर जाना जाता है। इसलिये यहाँ सहकारी समितियाँ भी बहुत है। प्रदेश के 44 जनपदों में तक़रीबन 28 जनपद पूरी तरह से गन्ना उत्पादक है। गन्ने की बम्पर पैदावार को देखते हुए यहाँ तक़रीबन 119 चीनी मिल है जिनमें तक़रीबन 35 लाख गन्ना किसान सहकारी गन्ना विकास समितियों से किसी न किसी तरह से जुड़े हुए है। ये सहकारी समितियाँ ही गन्ना किसानों से चीनी मिलों तक गन्ना भिजवाने का काम करती है। ये समितियाँ किसानों की आय बढ़ाने का बडा माध्यम है। बस ज़रूरत है तो इन्हें उचित प्रबंधन के साथ आर्थिक एवं वित्तीय शक्ति देने की।

वीरेन्द्र सिंह मस्त ने कहा कि कृषि एवं किसान कल्‍याण मंत्रालय, एनसीडीसी और वाणिज्‍य मंत्रालय द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित इस तीन दिवसीय सहकार मेले को देखते हुए लगता है कि राज्य स्तर पर भी इस तरह के सहकारी मेलों का आयोजन होना चाहिए ताकि गन्ना बहुल जिलों में गुड, शक्कर और खांडसारी के साथ लघु स्तर पर चीनी उद्योग से जुड़ी इकाइयाँ लगाकर गन्ना किसानो और चीनी उद्ममियों को प्रोत्साहन दिया जा सके।

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