देश को चीनी से जादा इथेनॉल की जरूरत : एनएसआई संचालक प्रो. नरेंद्र अग्रवाल 

कानपूर : चीनी उत्पादन में भारत शिर्ष पर पहुँच गया है, चीनी में आज तक नम्बर एक रहे ब्राजील ने चीनी की जगह  इथेनॉल उत्पादन को बढ़ावा देने का फैसला किया है। इसके चलते भारत चीनी उत्पादन में शिखर पर पहुंचा है, लेकिन इसके साथ ही भारत के सामने चीनी अधिशेष की समस्या भी बनी हुई है। अधिशेष चीनी की समस्या से निपटने के लिए और तेल आयात से मुद्रास्फीति पर आनेवाला दबाव कम करने के लिए केंद्र सरकार ने इथेनॉल उत्पादन को बढ़ावा देने के निर्णय लिया है।
केंद्र सरकार ने चीनी मिलों को गन्ने से सीधे इथेनॉल बनाने की भी अनुमति दे दी है जिसकी कीमत प्रति लिटर 59.19 रूपये मिलेगी और इथेनॉल उत्पादन बढ़ाने के लिए सरकार द्वारा सॉफ्ट लोन भी दिया गया है। कानपूर में आयोजित ‘चीनी नही इथेनॉल बनाओ’ राष्ट्रीय सेमिनार में ‘एनएसआई’ के संचालक प्रो. नरेंद्र अग्रवाल ने अपनी बात रखी।
अग्रवाल ने कहा, भारत सरका ने ब्राजील के तर्ज़ पर देसी चीनी मिलों को सीधा गन्ने से इथेनॉल बनाने के लिए कहा है। इसके लिए मिलों की आसवन क्षमता और डिस्टलरी के विकास के लिए 4400 करोड़ का सॉफ्ट लोन मुहैय्या कराया है। देश में 112 नई डिस्टलरी स्थापित करने के लिए सरकार की तरफ से ‘ग्रीन सिग्नल’ मिला है। देश में इस समय पेट्रोल में मिश्रण के लिए 300 करोड़ लिटर इथेनॉल की जरूरत है और अब देश में 150 करोड़ लिटर इथेनॉल का उत्पादन हो रहा है। १० प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण के लिए अभी भी 150 करोड़ लिटर जादा  इथेनॉल की जरूरत है।

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