गन्ना उत्पादन से भू-जल स्तर को ‘खतरा’

 

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लखनऊ : चीनी मंडी

उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक इन राज्यो में चीनी उद्योग काफी फलफुल रहा है, इस उद्योग के माध्यम से लाखो लोगों को रोजगार का अवसर भी प्राप्त हुआ है। लेकीन दुसरी तरफ बढते गन्ना उत्पादन से भू-जल स्तर बहुत गती से नीचे जा रहा है। इस वजह से सुखे की स्थिती बनी हुई है, इस समस्या से निजाद पाने के लिये सभी राज्य सरकारों द्वारा विकल्प की तलाश तेज हुई है।

नगदी फसल होने की वजह से गन्ने का उत्पादन बढ़ता जा रहा है। आर्थिक रूप से काफी अच्छी फसल है, लेकिन दूसरी ओर इसका नुकसान भी अब सामने आने लगा है। गन्ने की फसल से भूजल स्तर नीचे जा रहा है, जो चिंता का विषय बना हुआ है। गन्ना फसल के लिए सबसे अधिक पानी की आवश्यकता होती है। करीब 40 फीसदी पानी की पूर्ति बरसात के समय बारिश कर देता है, लेकिन 60 फीसदी पानी की पूर्ति मोटर पंप और बोर से होता है। नगदी और आसान फसल होने की वजह से किसान बड़ी संख्या में इसका उपत्पादन कर रहे हैं।

इससे सभी क्षेत्र में पानी की समस्या उत्पन्न हो जाएगी। फसलों के लिए भी पानी मिलना मुश्किल हो जाएगा। कई इलाको में तो पानी के लिए हाहाकार मच सकता है। इस समस्या को देखते हूये, राज्य की सरकारे ड्रीप इरिगेशन पर जोर दे रही है।

तो ही भविष्य के लिए पानी बचेगा

किसीको भी पानी के कमी की भरपाई कर पाना असंभव है। इसके चलते आज यदि इसमें सावधानी बरती जाती है तो ही भविष्य के लिए पानी बच सकता है। इसके लिए मुख्य रूप से फसल चक्र अपनाने की आवश्यकता है। गन्ने को लगातार न लगाकर एक वर्ष का अंतराल रखा जाए। इस एक वर्ष में गन्ने की जगह और कोई भी फसल लगाई जा सकती है। पानी की बचत के लिए गन्ने की खेती में भी सुधार की आवश्यकता है। आज की स्थिति में सभी किसान एक ही वैरायटी के गन्ने का उपयोग कर रहे हैं। इस वैरायटी में ही सबसे अधिक पानी की खपत होती है। कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार एक बूंद गन्ना रस तैयार होने के लिए 80 बूंद पानी ग्रहण करता है। ऐसे में अन्य वैरायटी के भी गन्ने लगाना आवश्यक है।

धान, हल्दी, जिमीकंद जैसी फसल भी फायदेमंद

ऐसा नहीं है कि केवल गन्ना ही नगदी फसल है, जिसके चलते अधिक उत्पादन लिया जाए। इसकी जगह कई फसल और उद्यानिकी है जिससे गन्ने से भी अधिक मुनाफा कमाया जा सकता है। मंहगे किस्म के धान, हल्दी, जिमीकंद ऐसे फसल है जिसमें पानी की मात्रा तो कम लगती ही है साथ ही लागत भी कम रहता है। ताकि जमीन की स्थिति भी बनी रहे और जल स्तर भी ठीक हो सके। लगातार गन्ना फसल के जल स्तर को नुकसान हो रहा है। इसके कारण फसल चक्र बदलना चाहिए। इससे सुधार होगा।

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