कच्ची चीनी निर्यात की नीति पर फैसला जरूरी- करख़नदारों की मांग

चीनी मंडी, कोल्हापुर: इस साल चीनी के सीजन में बकाया चीनी का प्रश्न निर्माण नहीं होना चाहिए इसलिए केंद्र सरकार ने कच्ची चीनी निर्यात की नीति पर फैसला तुरंत निश्चित करे, ऐसी मांग आज जिला बैंक में चीनी मिल अध्यक्षकों की बैठक में हुई। चीन के साथ बांग्लादेश, म्यानमार में चीनी की मांग है इसलिए यह निर्णय तुरंत लिया जाना चाहिए यह उम्मीद इस बैठक में की गई।
इस साल की बकाया चीनी और अगले साल का अतिरिक्त उत्पादन की वजह से बकाया चीनी का प्रश्न निर्माण होने वाला है। इस पार्श्वभूमी पर भारतीय आयत-निर्यात मंडल के शैलेश शर्मा की उपस्थिति में आज चीनी मिल अध्यक्षकों की बैठक जिला बैंक में हुई। बैठक की अध्यक्षता में बैंक के अध्यक्ष, आमदार हसन मुश्रीफ थे।
चीन के साथ बांग्लादेश और म्यानमार यह देश भारतीय चीनी के मुख्य ग्राहक बन सकते है। इस देश से चीनी की मांग है परन्तु इसके लिए कच्ची चीनी का उत्पादन होना जरुरी है। इस बात को जानकर केंद्र सरकार ने कच्ची चीनी निर्यात की नीति का तत्काल निर्णय लेने की आवश्यकता है। यदि यह नीति को जल्द तय किया, तो देश में बकाया चीनी का मुद्दा नहीं उठेगा। सीजन की शुरुवात में इस निर्णय की आवश्यकता है ऐसा मिलों के मालिकों ने बताया। इस बैठक में शर्मा ने निर्यातविषयक नीति की जानकारी दी।
कच्ची चीनी का आंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रति क्विंटल १५०० रूपये दाम है। गन्ने की एफआरपी, कटाई वाहतूक खर्च, कर्मचारी वेतन इसका विचार करते इस दाम का खर्च मिले उठा नहीं सकती। वर्तमान में केंद्र सरकार चीनी निर्यात को प्रति क्विंटल ७०० रूपये का अनुदान देती है, लेकिन फिर भी मिलों को नुकसान होता है। इस नुकसान को पूरा करने के लिए, बैठक में अनुदान को १२०० रुपये प्रति क्विंटल तक बढ़ाने की मांग की गई। इसके अलावा, चीनी निर्यात के मौजूदा २०% कोटा बढ़ाने की मांग है।
मिलों ने चीनी बंधक पर ऋण लिया है। अगर बैंक ने हप्ता दिया, तो बैंक चीनी बिक्री को अनुमति देगी, और उम्मीद है कि इस  विचार का फैसला किया जाना चाहिए। यदि चीनी का उठाव हुआ, तो देश में चीनी की मांग बढ़ेगी, जिसके द्वारा दरों में भी वृद्धि होगी।
इस बैठक को बिद्री के अध्यक्ष के. पी. पाटिल, क्रांति-कुंडल के लाड, राजाराम मिल के तज्ज्ञ पी. जी. मेढ़े आदि उपस्थित थे।

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