राष्ट्रीय शर्करा संस्थान द्वारा “शिक्षक दिवस” कार्यक्रम बड़े पैमाने पर आयोजित करने का निर्णय

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राष्ट्रीय शर्करा संस्थान, कानपुर द्वारा इस वर्ष “शिक्षक दिवस” कार्यक्रम को वृहद पैमाने पर आयोजित करने का निर्णय लिया गया है। आज हम आजादी का 75वाँ वर्षगांठ मना रहे हैं और इसके तत्वाधान मे “आजादी का अमृत महोत्सव” कार्यक्रम के अंतर्गत संस्थान मे “शिक्षक दिवस” कार्यक्रम के दौरान संस्थान के उन सभी प्रतिष्ठित भूतपूर्व निदेशकों और आचार्यों को आमंत्रित करने का निर्णय लिया गया है जिन्होने संस्थान के अकादमिक उपलब्धियों को हासिल करने मे अपना बहुमूल्य योगदान दिया है। प्रो. नरेंद्र मोहन, निदेशक, राष्ट्रीय शर्करा संस्थान ने कहा कि इन शिक्षकों के योगदान के कारण ही संस्थान शर्करा उद्योग को प्रतिस्पर्धी तकनीकी मानव संसाधन उपलब्ध कराने मे सक्षम हो सका है। इसके अतिरिक्त ऐसी सभी महिला शिक्षिकाओं जिन्होने संस्थान से अपना अनुसंधान (Ph.D) पूरा करने के उपरांत अन्य संस्थानों अथवा महाविद्यालयों मे शिक्षण का कार्य किया है उन्हे भी सम्मानित किया जाएगा।

संस्थान के शर्करा अभियांत्रिकी अनुभाग के आचार्य प्रो. डी स्वेन ने बताया कि इस कार्यक्रम के दौरान “भारतीय शर्करा उद्योग – कल, आज और कल” विषय पर एक सम्मेलन भी आयोजित किया जाएगा। इस सम्मेलन मे शर्करा उद्योग की उत्पादन क्षमता, शर्करा उत्पादन, सह-उत्पाद की उपयोगिता सुनिश्चित करने और उनकी तकनीकी दक्षता आदि के आधार पर भारतीय शर्करा उद्योग के स्वतंत्रता प्राप्ति के उपरांत हुये विकास पर विचार विमर्श किया जाएगा। कार्यक्रम के दौरान संस्थान के शिक्षण संकाय सदस्यों के अतिरिक्त शर्करा उद्योग से जुड़े अन्य प्रतिष्ठित वक्ताओं के द्वारा विचार व्यक्त किए जाएँगे, जिससे शर्करा उद्योग को सतत लाभप्रद बनाने के लिए उसके भविष्य की आधारशीला तय की जा सके।

इस अवसर पर उत्तर प्रदेश सरकार के गन्ना विकास एवं शर्करा उद्योग मंत्रालय के माननीय मंत्री श्री सुरेश राणा के साथ-साथ उच्च शिक्षा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय की माननीया मंत्री श्रीमती नीलिमा कटियार ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति के लिए सहमति प्रदान की है। कार्यक्रम के दौरान उनके द्वारा संस्थान के ‘मॉडल-कक्ष’ का उद्घाटन भी किया जाना है जिसमे शर्करा उद्योग मे 1930 से लेकर अब तक उपयोग किए जाने वाले उपकरणों के मॉडल रखे गए हैं। यह मॉडल-कक्ष शर्करा उद्योग मे प्रयुक्त उपकरणों के तकनीकी विकास से लेकर वर्तमान में भारत के सम्पूर्ण शर्करा इकाई मशीनरी उत्पादन की क्षमता को दर्शाता है।

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