उत्तर और दक्षिण भारत के लिए चीनी की अलग-अलग न्यूनतम बिक्री मूल्य की मांग

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नई दिल्ली : चीनी मंडी

देश में 2018-19 चीनी सीजन में कुल चीनी उत्पादन 330 लाख टन होने की उम्मीद है। 104 लाख टन के कैरी फॉरवर्ड स्टॉक के साथ, 260 लाख टन की स्थानीय खपत और 35 लाख टन के निर्यात को छोड़कर, भारत में 1 अक्टूबर, 2019 को नया पेराई सत्र शुरू होने पर, 139 लाख टन का रिकॉर्ड चीनी स्टॉक होगा। इसीलिए चीनी वर्ष 2019-20, देश के लिए बहुत चुनौतीपूर्ण हो सकता है। अधिशेष चीनी, निर्यात में कमी और कीमतों में गिरावट के साथ चीनी उद्योग के विभिन्न समस्याओं की तरफ केंद्र सरकार का ध्यान आकर्षित करने के लिए राष्ट्रीय सहकारी चीनी मिल महासंघ के अध्यक्ष दिलीप वलसे पाटिल ने 29 मई को केंद्रीय खाद्य सचिव रविकांत, चीनी संयुक्त सचिव डॉ. सुरेश कुमार वशिष्ठ और श्रीकर परदेशी से नई दिल्ली में मुलाकात की और चीनी उद्योग के विषय पर चर्चा की।

साथ ही साथ इस विषय पर भी चर्चा हुई की, वर्तमान 30 लाख टन आरक्षित बफर स्टॉक योजना को बढ़ाकर 50 लाख टन किया जाना चाहिए, ताकि चीनी की बिक्री और कीमत में संतुलन बना रहे और मिलें समय पर किसानों का भुगतान कर सके। इसके अलावा, देश के बाहर कम से कम 70-80 लाख टन चीनी का निर्यात करना भी आवश्यक है और मौजूदा वर्ष के अनुसार केंद्र सरकार से सहायता प्राप्त करना भी आवश्यक है, यह बात भी सामने रखी।

बैठकों के दौरान चीनी की वर्तमान न्यूनतम बिक्री मूल्य Rs 3100 में वृद्धि और उत्तर भारत और दक्षिण भारत के लिए चीनी की अलग-अलग न्यूनतम बिक्री मूल्य हो, यह मांग भी की गयी।

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