बाढ़ से कम प्रभावित गन्ने को जल्द से जल्द पेराई करने की मांग

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कोल्हापुर : चीनी मंडी

बाढ़ ने कोल्हापुर और सांगली जिले में तबाही मचाई है, बाढ़ इस साल चीनी सीजन को भी काफी प्रभावित करने वाला है। बाढ़ की वजह से कोल्हापुर विभाग में लगभग 45 लाख मीट्रिक टन से अधिक गन्ना प्रभावित हुआ है। कोल्हापुर जिले में 30 लाख मीट्रिक टन और सांगली जिले में 15 लाख मीट्रिक टन गन्ना फसल पूरी तरह से खराब हो गई है। गन्ना किसानों को बाढ़ की वजह से करोड़ो रुपये का नुकसान हुआ है।

इस बीच, आगामी सीजन शुरू करने के लिए शुक्रवार को चीनी आयुक्त कार्यालय में एक बैठक बुलाई गई थी। चीनी आयुक्त शेखर गायकवाड़ की अध्यक्षता में इस बैठक में लंबी चर्चा हुई। राज्य भर के सभी सहकारी और निजी मिलों के कार्यकारी निदेशकों की उपस्थिति में प्रत्येक जिले में गन्ना उत्पादन की समीक्षा की गई।

कई गन्ना उत्पादकों ने बाढ़ से कम प्रभावित गन्ने को जल्द से जल्द क्रशिंग करने की बात कही है। इसके लिए पेराई सीजन जल्द शुरू करने की मांग कोल्हापुर, सांगली, सातारा और पुणे जिलों के मिलों द्वारा की गई है। यदि एक नवंबर को मिलों को शुरू किया जाता है, तो पहले बाढ़ से बचे हुए गन्ने को काट दिया जाएगा और फिर बाढ़ प्रभावित इलाकों का गन्ना पेराई के लिए इस्तेमाल किया जाएगा।

पश्चिमी महाराष्ट्र को छोड़कर, मराठवाड़ा और विदर्भ में मिलों ने एक दिसंबर से चीनी सीजन शुरू करने की मांग की है । उन्होंने मांग की कि, दिसंबर तक गन्ना परिपक्व होने पर गन्ने का सीजन शुरू किया जाए। इसलिए, पश्चिमी महाराष्ट्र और मराठवाड़ा, विदर्भ में चीनी मिलों के पेराई के लिए अलग अलग समय की घोषणा करनी होगी। कोल्हापुर, सांगली, सातारा और पुणे जिलों में मिलों ने 1 नवंबर को सीजन की शुरुआत करने की मांग की है। सीजन की शुरुआत के लिए कैबिनेट के सामने मिलों की मांग रखी जाएगी और उनके फैसले से सीज़न की तारीख की घोषणा की जाएगी।

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