महाराष्ट्र: संकट में होने के बावजूद चीनी मिलें कर रही है गन्ना बकाया चुकाने की कोशिश

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पुणे : चीनी मंडी

चीनी उद्योग जो पहले से ही त्रस्त है कोरोना के कारण उस पर आर्थिक बोझ और बढ़ गया है। लेकिन फिर भी चीनी मिलें गन्ना भुगतान करना का प्रयत्न कर रही है। अगर महाराष्ट्र की बात करे तो, राज्य की चीनी मिलों को अगले साल बाढ़ और सूखे ने परेशान किया था, लेकिन जैसे तैसे मिलें गन्ना पेराई कर रहे थे, लेकिन अब कोरोना ने उनकी मुश्किलें और बढ़ा दी है।

चीनी मिलों को चीनी बिक्री और उसके उपोत्पाद से ही राजस्व प्राप्त होता है, लेकिन वह सब भी ठप पड़ा हुआ है, ऐसे समय में गन्ना बकाया भुगतान करना भी उनके लिए चुनौतीपूर्ण है, लेकिन फिर भी महाराष्ट्र में कई चीनी मिलों ने 100 प्रतिशत गन्ना भुगतान किया है। लोकमत में प्रकाशित खबर के मुताबिक, अप्रैल के अंत तक राज्य के 86 चीनी मिलों ने गन्ना उत्पादकों को 100 प्रतिशत गन्ना भुगतान किया है। महाराष्ट्र में इस सीजन में 146 चीनी मिलों ने गन्ना पेराई में भाग लिया था।

आपको बता दे, चीनी की बिक्री ठप होने के कारण मिलों की आर्थिक स्थिति गड़बड़ा गई है। जिसके कारण वे गन्ना बकाया चुकाने में भी विफल हो रहे है। देश के दो बड़े चीनी उत्पादक राज्य उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र समेत अन्य राज्यों में गन्ना बकाया अभी भी बाकी है।

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