केंद्र के आदेश के बावजूद अधिकांश चीनी मिलें इथेनॉल के उत्पादन करने से कतरा रही हैं

197

नई दिल्ली। केंद्र सरकार के आदेश के बावजूद देश की अधिकांश चीनी मिलें इथेनॉल के उत्पादन से आनाकानी करने लगी हैं। इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन (इस्मा) के मुताबिक देश में कुल 530 चीनी मिलें से केवल 175 चीनी मिलें ही इथेनॉल का उत्पादन कर सकती हैं। गये साल जून 2018 में, सरकार ने इथेनॉल के उत्पादन को प्रोत्साहित और उसके उत्पादन क्षमता को बढ़ाने के लिए ऋण पर ब्याज दर में रियायत देने का निर्णय लिया। यह देश में इथेनॉल उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए किया गया था।

खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग ने सब्सिडी वाले ऋण पर 260 इथेनॉल परियोजनाओं को मंजूरी दी है, जिसके लिए चीनी कारखानों को बैंकों के साथ गठजोड़ करना होगा। हालाँकि, डिस्टिलरी को जीरो डिस्चार्ज ’मानदंडों का पालन करना चाहिए, क्योंकि पिछले दिनों केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड या नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल द्वारा कई मिलों पर जुर्माना लगाया गया है या बंद करने का आदेश दिया गया है।

देश में इथेनॉल की आवश्यकता 2019-20 (दिसंबर-नवंबर) में पेट्रोल के साथ मिश्रित होने वाले 10 प्रतिशत के लिए 330 करोड़ लीटर है, और मिलों ने 245 करोड़ लीटर की आपूर्ति के लिए अनुबंध किया है, लेकिन अक्टूबर 2019 के मध्य तक केवल 175 करोड़ लीटर की आपूर्ति की है।

तेल विपणन कंपनियों ने पेट्रोल के साथ सम्मिश्रण के लिए 2019-20 (दिसंबर-नवंबर) के दौरान चीनी मिलों से लगभग 511 करोड़ लीटर इथेनॉल खरीदने की योजना बनाई है।

देश में चीनी अधिशेष से निपटने के लिए सरकार ने मिलों को चीनी एथेनॉल में परिवर्तित करने की अनुमति दी है। हालही में केंद्र सरकार ने बी- हैवी मोलासेस वाले एथेनॉल की कीमतें 52.43 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 54.27 रुपये प्रति लीटर कर दी हैं और वही दूसरी ओर सी-हैवी मोलासेस वाले एथेनॉल की कीमत 43.46 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 43.75 रुपये लीटर कर दी हैं। गन्ने के रस, चीनी, चीनी सीरप से सीधे बनने वाले एथेनॉल का भाव 59.48 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है।

इस्मा के महानिदेशक, अविनाश वर्मा ने कहा कि सभी मिलों को इसका फायदा उठाना चाहिए और इथेनॉल उत्पादन क्षमताओं को बढ़ाना चाहिए क्योंकि इससे उन्हें अधिशेष चीनी उत्पादन को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी और इथेनॉल को बढ़ाया जा सकता है। इससे मिलर्स को गन्ने के उत्पादन, चीनी की कीमतों या अनसोल्ड शुगर के इन्वेंट्री बिल्ड-अप के बारे में ज्यादा चिंता करने की जरूरत नहीं होगी।

वर्मा ने कहा कि सीपीसीबी और एनजीटी के मानकों को पूरा करने के लिए मिलें काम कर रही है। सरकार द्वारा इथेनॉल उत्पादन पर जोर देने के बावजूद, कई मिलें अपनी मौजूदा सुविधाओं को अपग्रेड करने या नए को लगाने पर भारी निवेश करने से हिचकिचा रही हैं। वर्मा ने कहा कि अगर सभी 260 परियोजनाएं, जिन्हें नई डिस्टिलरी के लिए या विस्तार के लिए सब्सिडी वाले ऋणों के लिए मंजूरी दी गई है, चालू हो जाएं तो हम 250 करोड़ लीटर की अतिरिक्त इथेनॉल उत्पादन क्षमता की उम्मीद कर सकते हैं। यह हमें कुछ वर्षों में 550-600 करोड़ लीटर उत्पादन देने में मदद कर सकता है। हम तब देश के लिए 15 प्रतिशत सम्मिश्रण स्तरों को देखना शुरू कर सकते हैं, और 2030 तक सरकार के 20 प्रतिशत के लक्ष्य को प्राप्त करने की योजना बनाना शुरू कर सकते हैं।

वर्मा ने कहा कि इस्मा को अगले 2-3 वर्षों में सभी फीडस्टॉक्स से इथेनॉल का उत्पादन 550-600 करोड़ लीटर तक पहुंच का अनुमान है। सरकार द्वारा ऋण पर सब्सिडी मिलने से मिलें इथेनॉल का उत्पादन शुरू सकती हैं और नकदी प्रवाह तथा लाभप्रदता में भी सुधार कर सकती हैं। साथ ही वे अपने अधिशेष चीनी उत्पादन को भी कम कर सकती हैं।

यह न्यूज़ सुनने के लिए प्ले बटन को दबाये.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here