“ग्रामीण महिला शक्ति द्वारा उन्नत गन्ना बीज वितरण कार्यक्रम योजना” के कुषल संचालन हेतु नवीन दिशा-निर्देश निर्गत

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प्रदेष के आयुक्त, गन्ना एवं चीनी, संजय आर. भूसरेड्डी द्वारा गन्ना किसानों एवं विभिन्न स्रोतों से प्राप्त सुझावों एवं अनुभवों के आधार पर विभिन्न गन्ना उत्पादक जनपदों की ग्रामीण महिला उद्यमियों को स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार उपलब्ध कराने तथा उन्हें अधिक से अधिक रूप में स्वावलम्बी बनाने एवं आय के अवसर उपलब्ध कराने की दृष्टि से ’’ग्रामीण महिला शक्ति द्वारा उन्नत गन्ना बीज वितरण कार्यक्रम योजना’’ के कुषल संचालन हेतु नवीन दिशा-निर्देश निर्गत किये गये हैं।

इस सम्बन्ध में विस्तृत जानकारी देते हुए गन्ना आयुक्त ने बताया कि ’’ग्रामीण महिला शक्ति द्वारा उन्नत गन्ना बीज वितरण कार्यक्रम योजना’’ अन्तर्गत स्थानीय स्तर पर महिला स्वयं सहायता समूहों का गठन करना एवं इन समूहों के द्वारा सिंगल बड तथा बड चिप विधि से गन्ने की उन्नत किस्मों की नर्सरी तैयार करना। इन समूहों द्वारा तैयार की गई नर्सरी से सीडलिंग का वितरण सुनिश्चित कराकर गन्ना बुआई का आच्छादन बढ़ाना तथा त्रिस्तरीय गन्ना बीज उत्पादन कार्यक्रम के अन्तर्गत पौधशाला का अधिष्ठापन एवं बीज वितरण कराना आदि कार्यों को सम्मिलित किया गया है।

उन्होने बताया कि नवीन दिषा-निर्देषों के अनुसार स्वंय सहायता समूह का गठन परिषद को इकाई मानते हुये ’’पहले आओ पहले पाओ’’ के आधार पर किया जायेगा। एक परिषद के अधीन 15 से 40 महिला समूहों का गठन किया जा सकता है। प्रत्येक स्वयं सहायता समूह में महिला सदस्यों की संख्या न्यूनतम 10 एवं अधिकतम 30 होगी। गन्ना आयुक्त के स्तर से स्वीकृत की गई किस्मों के बीज संवर्धन को वरीयता दी जायेगी तथा अस्वीकृत किस्मों, रोगग्रस्त फसल एवं बाहरी स्रोतों से प्राप्त गन्ना किस्मों का बीज संवर्धन नहीं किया जायेगा और इस पर कोई अनुदान भी देय नहीं होगा। लखनऊ, अयोध्या, देवीपाटन, गोरखपुर एवं देवरिया परिक्षेत्र में लाल सड़न रोग के दृष्टिगत को.0238 किस्म का सीडलिंग इस योजना में तैयार नहीं किया जायेगा।

उन्होंने यह भी बताया कि महिला स्वयं सहायता समूहों द्वारा उत्पादित गन्ना सीडलिंग को स्थानीय कृषकों को प्रदर्शनों की स्थापना एवं पौधशाला अधिष्ठापन तथा सामान्य बुवाई हेतु वितरित कराया जायेगा। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन के अन्तर्गत स्थापित किये जाने वाले प्रदर्शनों में गन्ने की बुवाई महिला स्वयं सहायता समूह द्वारा सिंगल बड चिप एवं सिंगल बड से तैयार सीडलिंग से ही की जायेगी। स्वयं सहायता समूहों के प्रशिक्षण की व्यवस्था सम्बन्धित गन्ना विकास परिषद द्वारा की जायेगी तथा यथावश्यकता गन्ना शोध परिषद के वैज्ञानिकों को भी आमंत्रित कर उनका सहयोग लिया जायेगा। स्वयं सहायता समूहों को आवश्यक मशीनें यथासंभव राजकीय अनुदान द्वारा निःशुल्क अथवा इनपुट क्रेडिट सुविधा के अन्तर्गत ऋण/छूट पर उपलब्ध कराई जायेगी।

अनुदान की व्यवस्था एवं दरों के सम्बन्ध में जानकारी देते हुए श्री भूसरेड्डी ने बताया कि ’अ’ श्रेणी की गन्ना परिषदें अधिकतम रू.60.00 लाख, ’ब’ श्रेणी की गन्ना परिषदें अधिकतम रू.40.00 लाख एवं ’स’ श्रेणी की गन्ना परिषदें अधिकतम रू.25.00 लाख का अनुदान अपने संसाधनों से वहन कर सकेंगी। किसी एक महिला स्वयं सहायता समूह को अधिकतम पांच लाख सीडलिंग के वितरण पर अनुदान देने की व्यवस्था नये दिषा-निर्देषों में की गयी है। अनुदान का भुगतान सम्बन्धित समूहों को सीधे खाते में किया जाएगा नकद भुगतान की अनुमन्यता नहीं होगी। बड चिप विधि से उत्पादित सीडलिंग पर अधिकतम रू1.50 प्रति सीडलिंग तथा सिंगल बड विधि से उत्पादित सीडलिंग पर अधिकतम रू1.30 प्रति सीडिलिंग का अनुदान देय होगा। समूह के कार्यों, परिषद द्वारा समूहों को किये गये भुगतान तथा सम्बन्धित अभिलेखों की जाॅच हेतु विभागीय जाॅच दल गठित कर समय≤ पर पर्यवेक्षण किया जायेगा।

यह भी उल्लेखनीय है कि ’’ग्रामीण महिला शक्ति द्वारा उन्नत गन्ना बीज वितरण कार्यक्रम योजना’’ सफलता के नये आयाम स्थापित कर रही है जिसकी पुष्टि के लिए यदि हम आॅंकड़ों पर निगाह डालें तो इस योजना के अन्तर्गत अब तक प्रदेष के 37 गन्ना उत्पादक जिलों में 2904 महिला स्वयं सहायता समूहों का गठन किया जा चुका है तथा इन ग्रामीण महिला उद्यमियों द्वारा गठित समूहों के माध्यम से अब तक 1450 लाख सीडलिंग का उत्पादन किया जा चुका है। जिससे उन्हें लगभग रू.4350 लाख तथा प्रति समूह औसतन 1.50 लाख प्रतिवर्ष की आय प्राप्त हुयी है। इस योजना से अब तक 57,680 ग्रामीण महिलाओं को स्वरोजगार उपलब्ध हुआ है तथा कुल 2,52,720 कार्य दिवस का रोजगार सृजित हुआ है। समूहों द्वारा उत्पादित सीडिलिंग की बुआई से कुल 5,440 हे. नवीन गन्ना किस्मों का प्रदर्षन स्थापित कर नवीन किस्मों के गन्ने का आच्छादन बढ़ाया गया।

इस योजना के माध्यम से ग्रामीण स्तर पर रोजगार के विकल्प उपलब्ध होने के कारण ग्रामीण महिला उद्यमियों के मनोबल में अभिवृद्धि हुयी है तथा आय सृजन होने से इस वर्ग के जीवन स्तर में सुधार हो रहा है।

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