यशवंत चीनी मिल मजदूरों के लिए दिवाली कड़वी…

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पुणे : चीनी मंडी

थेउर (ता हवेली) की बंद पड़ी हुई यशवंत मिल को शुरू करने का अभी तक कोई फैसला नही हुआ है। पिछले चार-पांच सालों से श्रमिकों को वेतन भी नही मिला है, इसलिए यह आशा की जा रही थी कि अगर इस साल मिल शुरू होगी तो श्रमिकों का भुगतान किया जाएगा। लेकिन,मिल शुरू होने की कोई गुंजाईश नही दिख रही है और इस साल फिर मज़दूरों के लिए दिवाली कड़वी साबित होगी।

राजनीति के कारण यशवंत मिल शुरू नही हो पा रही है, जिसके कारण मिल श्रमिकों का वेतन मामला भी अनसुलझा रहा है। इससे श्रमिकों में भी काफ़ी रोष है। उच्च न्यायालय ने आदेश दिया था कि, श्रमिकों को चीनी की बिक्री की आय से भुगतान किया जाए। हालांकि, चीनी बिक्री प्रक्रिया अब तक पूरी नहीं हुई है। बकाया वेतन के लिए, श्रमिकों ने समय-समय पर परिवार के सदस्यों के साथ मार्च, अनशन और धरना आंदोलन भी किया है। कोर्ट ने आदेश दिया है कि ये वेतन चीनी बिक्री से प्राप्त आय से भुगतान किया जाए।

इस संबंध में, श्रमिकों ने श्रम आयुक्त के दरवाजे पर दस्तक देने के बाद, आयुक्त ने चीनी को जब्त करने और इसे नीलामी में बेचने का आदेश दिया था। इस आदेश के बाद 26 फरवरी, 2012 को 82092 क्विंटल चीनी हवेली के तत्कालीन तहसीलदार संधेश शिर्के, तत्कालीन कार्यकारी निदेशक अशोक पाटिल, तत्कालीन बोर्ड अधिकारी विद्याधर सातव की उपस्थिति में की गई थी। इसमें से, उत्पाद शुल्क को छोड़कर, लगभग 20 करोड़ रुपये उपलब्ध हुए थे। अदालती आदेश के अनुसार हवेली तहसीलदार के नाम से बैंक खाते में राशि जमा की गई। अदालत के आदेश के अनुसार, तब तहसीलदार शिर्के ने मिल श्रमिकों को 11 करोड़ 5 लाख 44 हजार 925 रुपये का एक चेक सौंपा था, जिसमें से श्रमिकों को कुछ राशि का भुगतान किया गया था। हालाँकि, श्रमिकों का भुगतान अभी भी बकाया है।

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