चीनी की कीमतों में गिरावट; मिलें अप्रैल माह का कोटा बेचने में सकती है असमर्थ

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कोरोना महामारी से बचाव और रोकथाम के लिए पूरे देश में लॉकडाउन जारी है। इस लॉकडाउन के कारण विभिन्न वस्तुओं के उत्पादन, मांग और आपूर्ति का संतुलन बिगड़ा नजर आ रहा है। वित्तीय संकट मुंह बाये खड़ा हो गया है। भारतीय चीनी उद्योग को भी नो डिमांड का सामना करना पड़ रहा है। देश की चीनी मिलें संघर्ष कर रही है जबकि इस दौरान गर्मी में चीनी की मांग अधिक रहती है।

कोरोना वायरस महामारी के प्रकोप के कारण देशभर में लॉकडाउन के कारण चीनी मिलों को अपने आवंटित चीनी मासिक कोटा बेचने में काफी दिक्कत हो रही है। हाल ही में खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग ने भी चीनी की 21 लाख मेट्रिक टन मार्च बिक्री कोटा की समय अवधि को 15 दिन बढ़ा दिया था ताकि उसे बेचा जा सके। लेकिन चीनी मिलों के मुताबिक लॉकडाउन के कारण पिछले कई हफ्तों से चीनी की कोई मांग नहीं आ रही है।

मौजूदा महामारी के दौरान चीनी के अप्रैल कोटे जो कि 18 लाख मेट्रिक टन है, को कैसे बेचा जाए, पर चीनी उद्योग से जुड़े दिग्गजों ने अपने मत व्यक्त किये। चीनी मंडी न्यूज को मिली जानकारी के मुताबिक इस कोटे का अबतक केवल 30 से 40 प्रतिशत ही बिक्री हो सकी है।

उत्तर प्रदेश स्थित द्वारिकेश शुगर इंडस्ट्रीज़ के प्रबंध निदेशक विजय बांका ने कहा कि मौजूदा समय में चीनी की मांग काफी खराब रही है। अप्रैल के लिए आवंटित कोटे में से हमने बमुश्किल 20 प्रतिशत ही चीनी बेच पाए हैं। जो कुछ भी चीनी कोटा बेचा गया है उसका अधिकांश हिस्सा रेक में बेची गई चीनी है।

महाराष्ट्र स्थित गोकुल मौली शुगर्स लिमिटेड के अध्यक्ष वीपी पाटिल ने कहा कि महाराष्ट्र की मिलों में भी मांग नहीं है। पाटिल ने कहा कि हमारे यहां भी चीनी की मांग नदारद है औऱ इसलिए हम भी आवंटित चीनी के कोटे को बेचने में सफल नहीं हो पाएंगे।

महाराष्ट्र की एक और कंपनी श्री गुरूदत्त शुगर्स लिमिटेड के कार्यकारी निदेशक राहुल घाटगे ने कहा कि हमें केवल व्यापारियों से मांग आ रही है, लेकिन वह भी तुलनात्मक रूप से कम है। मार्च 2020 के लिए आवंटित कोटा बेचने के लिए समय अवधि बढ़ाने का निर्णय यह सुनिश्चित करने में काफी मददगार रहा है कि चीनी स्टॉक बेचा जा सकता है।

महाराष्ट्र की छत्रपति राजाराम एसएसके लिमिटेड के विशेषज्ञ सलाहकार पीजी मेढे ने कहा कि चीनी की बिक्री औसतन 30% तक गिर गई है, चीनी का निर्यात भी थम गया है, रेलवे रेक डिलीवरी बिलकुल रुक गई है। सॉफ्ट ड्रिंक, मिठाई, चॉकलेट आदि बनाने वाली कंपनियों से कोई मांग नहीं आई है। ऐसे में नो डिमांड की वर्तमान स्थिति बनी रही तो मई के महीने में चीनी स्टॉक बेचना भी मुश्किल हो जाएगा क्योंकि उनके पास अप्रैल का कोटा भी रहेगा, जिससे उन्हें गोदामों में ही रखना होगा। इस बीच मौसम विभाग ने इस साल मानसून के समय पर होने की भविष्यवाणी की है। ऐसे में यदि चीनी मिलों के पास चीनी का स्टॉक पड़ा रहा तो मानसून में मिलों को नुकसान का सामना करना पड़ सकता है।

कर्नाटक के अथानी शुगर्स लिमिटेड के कार्यकारी निदेशक एवं सीएफओ योगेश पाटिल ने कहा कि कर्नाटक में भी चीनी मिलों की लगभग यहीं स्थिति है। चीनी की मांग कमजोर रही है। हालांकि मार्च के लिए आवंटित चीनी कोटे को बेचने के लिए जो समय सीमा बढ़ाई गई है, उससे मिलों को थोड़ा फायदा हुआ है, लेकिन मांग कम रही है और हम अप्रैल 2020 के महीने के लिए आवंटित कोटा का केवल 30% ही बेचने में कामयाब रहे हैं। और यह स्थिति तबतक जारी रहेगी जबतक लॉकडाउन नहीं उठेगा और रेस्तरां, शॉपिंग मॉल आदि नहीं खुलेंगे। इनके खुलने के बाद ही आइसक्रीम, पेय पदार्थ, जूस, कन्फेक्शनरी, मिठाई की मांग होगी और तब चीनी मार्केट से उठेगा।

तमिलनाडु स्थित ईआईडी पैरी के प्रबंध निदेशक एस. सुरेश ने चीनी के मौजूदा संकट पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा की वर्तमान खरीद केवल घरेलू परिवारों द्वारा की गई है जो दो महीने के लिए चीनी स्टॉक कर रहे हैं। लॉकडाउन की घोषणा के बाद से होटल, रेस्तरां जैसे सड़क-किनारे प्रतिष्ठान बंद कर दिए गए हैं, और थोक खरीदारों ने अब तक किसी भी मांग का प्रदर्शन नहीं किया है। मार्च महीने के कोटे को बेचने के लिए अप्रैल में हमें 10 से 12 दिन और लगे। मौजूदा स्थिति को देखते हुए, अप्रैल के कोटा का 60 से 65% मई तक आ सकता है।”

गुजरात स्थित गणेश शुगर मिल के अध्यक्ष संदीप मंगरोला ने कहा कि देशभर में लॉकडाउन को देखते हुए चीनी के कोटे को बेचने में मिलों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। मेरी राय में राज्य की चीनी मिलें आवंटित चीनी के कोटे का महज 10 से 20% ही बेचने में सफल हुए होंगे, क्योंकि अप्रैल के आरंभिक हफ्तों में हम केवल मार्च का कोटा पूरा करने में ही लगे रहे।

पंजाब के एक निजी चीनी मिल ने भी इंडस्ट्री की मौजूदा हालात पर असंतोष व्यक्त किया।

देश में चीनी की मौजूदा परिस्थिति को देखते हुए लगता है कि जबतक लॉकडाउन खत्म नहीं होता चीनी की मांग कमजोर ही रहेगी। मौजूदा समय में चीनी के एक्स मिल भाव है (बिना जीएसटी के) : महाराष्ट्र S/30 3040 से 3100 रुपए, कर्नाटक S/30 चीनी की दर 3250 से 3300 रुपए और M 30 चीनी की दर 3400 से 3450 ऱुपए, तमिलनाडु S/30 चीनी की दर 3350 से 3450 और M/30 3400 से 3450 रुपए, गुजरात S/30 चीनी की दर 3180 और M/30 चीनी की दर 3250, उत्तर प्रदेश M/30 चीनी की दर 3100 से 3180 रुपए है।

चीनी मिलों के सामने अभी भी कई सवाल हैं कि क्या मौजूदा स्थिति में सुधार होगा और चीनी उद्योग कोरोना संकट से कैसे निपटेगा। चीनी मिलों को भारत सरकार से पूरी उम्मीद है कि वह इस इंडस्ट्री को वर्तमान महामारी से बचाने के लिए ठोस उपाय करेगी।

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