इस कारण देशभर में चीनी की बिक्री हुई ठप्प…

 

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नई दिल्ली : चीनी मंडी  

मार्च में चीनी की बिक्री पूरे देश में थम सी गई है। व्यापार और चीनी उद्योग के सूत्रों ने संकेत दिया कि, सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम बिक्री की कीमत में वृद्धि के पहले ही बहुत सारी चीनी 29 रुपये किलो बिक रही थी क्योंकि व्यापारी पहले से ही उम्मीद कर रहे थे कि, सरकार न्यूनतम बिक्री मूल्य बढ़ाकर 31 रुपये किलो करेगी। यह चीनी अभी भी पाइपलाइन में है। केंद्र सरकार, जो उचीनी द्योग की मांग पर जून 2018 से मासिक बिक्री कोटा निर्धारित कर रही है, सरकार ने मार्च के लिए 24.5 लाख टन का कोटा आवंटित किया है, यह देखते हुए कि गर्मी के महीनों में मासिक खपत सामान्य से अधिक होती है।

व्यापार स्रोतों ने पुष्टि कीया की चीनी मिलें पिछले 10 महीनों के दौरान उन्हें आवंटित चीनी कोटे का लगभग 85 प्रतिशत ही बेच पाई हैं। उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र के उद्योग स्रोतों के बीच नम बिक्री, एक-दूसरे पर एमएसपी 31 रुपये प्रति किलोग्राम से नीचे चीनी बेचने का आरोप लगाते रहे हैं। नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज़ के प्रबंध निदेशक प्रकाश नाइकनवरे ने पुष्टि की है की, हाँ, अभी भी पाइपलाइन में बहुत अधिक चीनी है।

उद्योग के सूत्रों ने कहा कि, केंद्र को अपने आवंटित मासिक बिक्री कोटा से अधिक चीनी बेचने के लिए मिलरों के खिलाफ कार्रवाई करने की संभावना है। महाराष्ट्र स्टेट कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज़ फेडरेशन के प्रबंध निदेशक संजय खताल ने मांग की है कि, केंद्र सरकार को चीनी मिलों की मासिक बिक्री के आंकड़े मिलाकर सार्वजनिक करने चाहिए। विभिन्न स्रोतों से उपलब्ध बिक्री के आंकड़ों में भारी भिन्नता है। केंद्र को उन्हें सार्वजनिक मंच पर उपलब्ध कराना चाहिए।

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