उत्तर प्रदेश की 60 मिलों को योगी सरकार ने इस कारण भेजा नोटिस

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अर्ध कुंभ मेले के लिए लिया हुआ निर्णय पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पेपर मिलों और डिस्टिलरी में सैकड़ों श्रमिकों को प्रभावित करने की संभावना है। 

लखनऊ : चीनी मंडी

योगी आदित्यनाथ की अगुवाई वाली सरकार ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश में गंगा और यमुना नदियों में अपना कचरा छोड़नेवाली  लगभग 60  गन्ना और पेपर मिलों को नोटिस जारी किया है, जिससे व्यापक जल प्रदूषण होता है। 14 जनवरी से 4 मार्च तक होने वाले अर्द्ध कुंभ मेले के आगे निर्णय ने क्षेत्र में कुछ तनाव पैदा कर दिया है क्योंकि इससे गन्ना और पेपर मिल के साथ-साथ भट्टियों का  भी काम बाधित हो गया है।

पश्चिमी यूपी की नदियां संगम में विलीन हो जाती हैं, जो तीन नदियों – गंगा, यमुना और सरवस्ती का समामेलन है, जिसके कारण सरकार द्वारा यह कदम उठाया जा रहा है। योगी सरकार ने मंगलवार को, आगामी अर्ध कुंभ त्योहार में भाग लेने वाले श्रद्धालुओं के लिए साफ पानी उपलब्ध कराने के लिए, 15 दिसंबर से 15 मार्च तक कानपुर और उन्नाव में चल रही टेनरी सहित 60 कारखानों को बंद करने का फैसला लिया। उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (UPPCB) के अधिकारी ने  बताया की, यह  कारवाई गंगा गैर-प्रदूषित रहने और सबसे बड़ी धार्मिक मण्डली में जाने वाले भक्तों को शुद्ध और साफ पानी मिलने के लिए की गई है।

छबिलापुरवा इलाके में शेष 28 टेनरियों के बंद होने के आदेश बाद में जारी किए जाने की संभावना है। उन्नाव में 15 से अधिक टेनरियों को पहले से ही कुंभ की अवधि के लिए बंद कर दिया गया है, हालांकि टेनरियां जिनके खतरनाक कचरे के लिए उपचार संयंत्र हैं, इसीलिए उन्हें बख्शा गया है।

गन्ना किसानों पर पड़ेगा नकारात्मक प्रभाव…

प्रदेश की कुछ किसान संघठनो ने आरोप किया है की, सरकार का यह निर्णय जनविरोधी और किसान विरोधी है। जिन किसानों ने गन्ना बोया है, उन्हें गन्ने का भारी नुकसान होगा । इन मिलों में काम करने वाले मजदूरों को भी बेरोजगारी का सामना करना पड़ रहा  है। जल प्रदूषण के नाम पर यह सरकार किसानों के साथ अन्याय कर रही है। गन्ने की पीक सीजन के दौरान आने वाला यह  निर्णय मिलों को बुरी तरह प्रभावित करेगा।

यूपी में एआईकेएस के पूर्व अध्यक्ष डीपी सिंह ने बताया की, यह धार्मिक आधार पर लिया गया एक बिल्कुल अनुचित और मनमाना फैसला है, मिलों ने किसानों को लंबे समय तक भुगतान नहीं किया है।   ऐसा करने से, चीनी मिल मालिकों को किसानों को इस दलील का भुगतान नहीं करने का बहाना मिल जाएगा कि कारखाने बंद हो गए हैं।

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SOURCEChiniMandi

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