गन्ना खेती की लागत कम करने का प्रयास

लखनऊ: प्रदेष के आर्थिक रूप से पिछडे विषेषकर लघु तथा सीमान्त गन्ना किसानों एवं अन्य वर्गो के कृषकों के हित के प्रति अत्यन्त सजग प्रदेश सरकार के मुखिया मा. मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ की प्रेरणा से तथा मा. मंत्री, गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग, श्री सुरेश राणा के निर्देश पर ‘‘किसानों की आय दुगुना‘‘ किये जाने की महत्वाकांक्षी योजना को साकार करने हेतु तत्पर प्रदेश के गन्ना विकास विभाग ने अनेक कदम उठाये हैं। जिसके तहत गन्ना खेती में आधुनिक कृषि यंत्रों के प्रयोग एवं सिंचाई हेतु माइक्रोइरीगेषन (ड्रिप सिंचाई) विधि को बढावा देने से गन्ना खेती की लागत कम करने का प्रयास हो रहा है।

इसी क्रम में आज प्रदेष के गन्ना आयुक्त श्री संजय आर. भूसरेड्‌डी की अध्यक्षता में गन्ना एवं उद्यान विभाग के अधिकारियों तथा ड्रिप संयत्र निर्माता फर्मों के प्रतिनिधियोें के साथ माइक्रो इरीगेषन के तकनीकी पहलुओं, समस्याओं और उनके निदान आदि पर विचार—विमर्ष गन्ना आयुक्त कार्यालय के स्कालर हास्टल में सम्पन्न हुई बैठक में किया गया। इस सम्बन्ध में जानकारी देते हुए गन्ना आयुक्त, श्री भूसरेड्‌डी ने बताया कि बैठक में सभी डि्‌्रप संयत्र निर्माता फर्मो को निर्देषित किया गया है कि प्रदेष के मण्डल/जनपद स्तर पर कृषकों हेतु जागरूकता कार्यक्रम/गोष्ठी का आयोजन करें जिसकी सूचना गन्ना विभाग/उद्यान विभाग को भी दी जाय, जिससे डि्‌्रप संयत्र निर्माता फर्म तथा दोनों विभाग संयुक्त रूप से उस गोष्ठी में कृषकों को माइक्रोइरीगेशन के तकनीकी पहलुओं से अवगत कराते हुए उन्हें लाभाविन्वत करा सकें।

पूर्वी उत्तर प्रदेष में कृषकों के यहॉ ड्रिप संयंत्र की स्थापना करा रही, निर्माता फमोर्ं को विशेष निर्देश दिये गये कि वह कृषकों के मध्य समन्वय स्थापित कर ड्रिप संयंत्र के लाभ पर विस्तृत चर्चा करते हुए ड्रिप की स्थापना करायें। जिन कृषकों के यहां ड्रिप संयत्र की स्थापना हो चुकी है, उस स्थापना स्थल पर प्रत्येक दो माह में फर्म के दक्ष कार्मिक विजिट कर कृषकों के यहॉ उत्पन्न हो रही समस्याओं का निदान करायें तथा किसी भी दषा में स्थापित ड्रिप संयत्र को सफलतापूर्वक चलाये जिससे यह अन्य कृषकों के लिये प्रेरक बन सकें। ड्रिप संयत्र निर्माता फर्मो द्वारा प्रत्येक जनपद में सहायता केन्द्रों की स्थापना कराई जाए तथा माइक्रोइरीगेशन का पूर्ण प्रचार—प्रसार करते हुए कृषकों के मोबाइल नम्बर संरक्षित कर उन्हें ड्रिप के रखरखाव पर तकनीकी साहित्य सोषल मीडिया के माध्यम से समय—समय पर उपलब्ध करायें।

विचार—विमर्ष के दौरान ड्रिप संयंत्र निर्माता कम्पनियों को यह निर्देष भी दिये गये कि, ड्रिप संयंत्र को समुचित तरीके से संचालित करने तथा उसके रखरखाव के सम्बन्ध में डिस्प्ले बोर्ड/वॉल पेन्टिंग पर आवश्यक दिषा—निर्देष के बिन्दुओं का उल्लेख करते हुए ड्रिप स्थापना स्थल पर लगायें जायें, जिनमें ड्रिप संचालन में क्या—क्या सावधानियॉ बरती जानी हैं उनका पूर्ण उल्लेख किया जाय। उल्लेखनीय है कि दिन—प्रतिदिन जल स्तर में हो रही कमी में सुधार हेतु भू—जल संचयन, उत्पादन एवं उत्पादकता में वृद्धि के दृष्टिगत ड्रिप सिंचाई पद्धति के माध्यम से पौधों को सीधे उनकी आवश्यकता के अनुसार जल एवं पोषकतत्व उपलब्ध कराकर गुणवत्तायुक्त उत्पादन के साथ जल व ऊर्जा की बचत होती है तथा खेत में खरपतवार में कमी आती है तथा कृषकों की आय में लगभग 20 प्रशित तक वृद्धि होती है।

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