देश के चीनी मिलों की आर्थिक स्थिति मजबूत करेगा एथनॉल

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नयी दिल्ली, 4 सितम्बर: केन्द्र सरकार देश में पैट्रोल, डीजल से चलने वाले वाहनों में उपयोग होने वाले ईंधन की आयात निर्भरता को कम करने के साथ देश के गन्ना किसानों और चीनी मिलों को आर्थिक रूप से सशक्त और मजबूत करने का काम कर रही है। इसी दिशा में कम उठाते हुए सरकार ने आज से तकरीबन 16 साल पहले 2003 में एथेनॉल ब्‍लेंडिंग कार्यक्रम चलाया था। तब सरकार ने पेट्रोल में 5 प्रतिशत एथनॉल मिलाने का लक्ष्‍य रखा था जिसके लिए 2007 की सीमा तय की गई थी। हालांकि इसमें सरकार को तब अपेक्षित सफलता नहीं मिली थी लेकिन लोगों को जागरुक करने के साथ गन्ना किसानों और चीनी मिलों को मुश्किल दौर में अतिरिक्त आमदनी अर्जित करने के लिए एक विकल्प सरकार ने दे दिया था। जो अब भी जारी है। इस दौरान सरकार ने एथनॉल खऱीद के लिए कई बार मूल्य भी निर्धारित किया। 2016 में सीसीए ने देश के किसानों और चीनी मिलों को आर्थिक तंगी से उबारने के लिए एथनॉल की कीमत 39 रूपये प्रति लीटर फिक्स की थी लेकिन तब तेल कम्पनियों ने खास रूचि नहीं ली। फिर जून 2018 में चीनी के रिकार्ड उत्पादन से चीनी के कीमतों में गिरावट और मिलों पर गन्ना किसानों के भारी बकाए की समस्या को देखते हुए सरकार ने निम्न श्रेणी के शीरे से उत्पादित एथनॉल का भाव 43.70 रुपए प्रति लीटर करने के साथ ही पहली बार बी श्रेणी के शीरे से उत्पादित एथनॉल का भी मूल्य तय कर 47.49 रुपए प्रति लीटर कर दिया। सरकार की इस पहल का असर ये हुआ कि घाटे में चल रही चीनी मिलों ने एथनॅाल के उत्पादन में रूचि लेना शुरु कर दिया। सरकार द्वारा पैट्रोल में मिलाने के लिए एथेनॉल की कीमत करीब 25 फीसदी से ज्यादा बढ़ाने को मंजूरी से जहां चीनी के भारी स्टॉक की समस्या को निपटाने में मदद मिली वहीं गन्ना किसानों का बकाया भुगतान भी तेजी से हुआ।
अब इसी क्रम में एक और महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए देश में एथनॉ़ल की उपयोगिता बढ़ाने और ईँधन आयात निर्भरता को धीरे धीर कम करने के लिए सरकार ने एथनॉल के दाम में 1.84 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोत्तरी कर 54.27 रुपये प्रति लीटर करने को मंज़ूरी दी है।

एथनॉ़ल की क़ीमतें बढ़ाने के मसले पर नई दिल्ली में मीडिया से बात करते हए केन्द्रीय पैट्रोलियम मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियां अब से चीनी मिलों से एथनॉल बढ़ी हुई दर पर खरीदेंगी। इससे किसानों और चीनी मिलों को तो फ़ायदा होगा ही देश में ईधन प्रदूषण कम करने के साथ ईंधन आयात निर्भरता कम कर विदेशी कर्ज कम करने में भी मदद मिलेगी।

मंत्री ने कहा कि सी श्रेणी के सीरे से तैयार एथनॉल का दाम 29 पैसे बढ़ाकर 43.75 रुपये प्रति लीटर और बी श्रेणी के सीरे से निकलने वाले एथनॉल की कीमत 1.84 रुपये बढ़ाकर 54.27 रुपये प्रति लीटर की गयी है। ये बढ़े हुये दाम एक दिसंबर 2019 से 30 नवंबर 2020 तक लागू रहेंगे।

केन्द्रीय मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने कहा कि हर साल सरकार को ईंधन आयात करने के लिए खाडी के देशों को करोडों रूपये देने होते है। इसे कम करने के लिए सरकार एथनॉल को विकल्प के तौर पर अपना रही है ताकि तेल आयात में सालाना एक अरब डॉलर की कमी कर वाहन ईंधन में एथनॉल उपयोग को बढ़ावा दिया जा सके।

गौरतलब है कि केन्द्र सरकार देश के गन्ना किसानों के बकाया की समस्या और चीनी मिलों के आर्थिक तंगी के विकल्प के तौर पर एथनॉल को इनसे निपटने का सबसे बडा विकल्प मानकर चल रही है इसी क्रम में अगले कुछ वर्षों में एथेनॉल मिश्रण को मौजूदा लक्ष्य से बढ़ाकर 10 फीसदी कर सकती है। सरकार के इस क़दम से एथनॉल बनाने के लिए गन्ने के रस के इस्‍तेमाल से जहाँ चीनी का स्‍टॉक कम होगा वही इथनॉल मिश्रित पेट्रोल कार्यक्रम से इथेनॉल की आपूर्ति होने से चीनी मिलें गन्ना किसानों का बकाया मूल्य समय पर चुकाने के लिए प्रेरित होंगी।

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